गीत
किसके लिए सजाए राधातूने कुंकुम और रंगोली।किसके इंतजार में पागलबैठी है,तू कितनी भोली।। वह तो छलिया, मधु का लोभीउपवन के
Read Moreहम तुम जब हैं साथ साथ तो, लोगों से क्या डरना है।राह सत्य की चलते रहना, काम सही जो करना
Read Moreउठो सफलता खड़ी सामने, मंजिल को अब पाना है।सागर हो कितना भी गहरा, मोती चुन के लाना है।गिरें नहीं बस
Read Moreहम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।राह सत्य की चलते रहना, काम सही जो करना है।
Read Moreपेट की ये आग करा लेती है करतब कितने-कितने! देखने वाले अंगुलियाँ दबा लें दाँतों के तलेहै नहीं कोई घर
Read Moreगीत नहीं आते अधरों परआँखें जब दो रोती हैं।पेट भरा रहता है जिनका,बस उनसे यह होती हैं।खोज़ रहे दो रोटी
Read Moreबूँद मिली जब सिंधु में, मिटा बूँद का भान।मैं-तू का पर्दा गिरा, एक हुआ अरमान। नदिया बनकर चल पड़ी, मन
Read Moreकलम हुई मजबूर जब, बिकने लगा विचार।आका की चौखट बनी, लेखक का दरबार॥ कलम उठी जो प्रश्न पर, कर देते
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