स्वार्थ रहित संबंध ही, मुझको हैं मंज़ूर
धन-दौलत के मोह से, रहता मैं हूँ दूर।प्रेम भरा व्यवहार ही, मुझको है मंज़ूर॥ धन से ऊँचा मान है, ऊँचा
Read Moreधन-दौलत के मोह से, रहता मैं हूँ दूर।प्रेम भरा व्यवहार ही, मुझको है मंज़ूर॥ धन से ऊँचा मान है, ऊँचा
Read Moreचेहरे भोले ओढ़कर, रखते मन में दाँव।भेड़ों में कुछ भेड़िये, घुसकर देते घाव॥ भेड़ों जैसे बीच में, छिपा हुआ शैतान।मौका
Read Moreअमृतकाल का पावन पर्व, गूंजे भारत का जयगान।त्याग, तपस्या, बलिदानों से, महका अपना हिन्दुस्तान॥संकल्पों की नई डगर पर, बढ़ता जाए
Read Moreनारी नर पर भारी है,फिर भी वह बेचारी है। आँसू का हथियार चलाती,सबको अपना दास बनाती,पलभर में घुटनों पर लाती,फिर
Read Moreफीकी हँसी मुख लिए, भीतर गहरा शोक।हँसते-हँसते जी रहे, मन को कितना रोक॥ पगडंडी की छाँव थी, सड़कों का विस्तार।सुविधाओं
Read Moreसारे दुःख जो सह गया, बनकर दृढ़ इंसान।पर अपनों की बेरुख़ी, ले बैठी मुस्कान॥ जीवन भर जो बाँटता, सबको अपना
Read Moreयूं ही नही दिल से दिल मिलते हैंअच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं। बड़ी-बड़ी बातें तो बहुत करतेलेकिन बात का
Read Moreधन आया घर-द्वार पर, बदले सब व्यवहार।नए अमीरी रंग में, छूट गए संस्कार॥ अपनापन जब से गया, भूले अपने लोग।अहंकार
Read Moreदृष्टि बदलते ही खुला, जीवन का विस्तार।मन ही बाँधे देह को, मन ही दे उद्धार॥ तारे दूर नहीं कभी, दूरी
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