गीत
बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन।आँखों में आकाश हो, पाँव तले जमीन॥ सपनों को आकार दे, रख मन में
Read Moreजब से आई गाँव में, ये शहरी सौगात।मेड़ करें ना खेत से, आपस में अब बात।। पीपल वाली छाँव भी,
Read Moreतू भी पायेगा कभी, फूलों की सौगात।धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥ काँटों वाली राह में, रखना मन विश्वास,मेहनत की
Read Moreनन्हे पग की चंचलता, भैया की मुस्कान,घर के छोटे आँगन में, बसता सारा जहान॥ बिस्तर बन गया खेलघर, हँसी बनी
Read Moreतीस दिनों के दर्द में, बने न जिसकी ढाल।उससे चाहो उम्र भर, सेवा फिर हर हाल।। जननी बनते ही नहीं,
Read Moreजिनके सिर है पाप की, ब्याज समेत उधार।बनकर साहूकार वो, करने चले सुधार।। खुद दलदल में धँस चुके, दें जग
Read Moreनस्ल देखकर ही रखें, ताल्लुक़ अब हर हाल।दिमाग शिक्षा ने दिए, जमीर हुए हलाल।। चेहरों पर तहज़ीब है, भीतर गहरा
Read Moreमुँह बाए प्यासी है धरतीकरे मेघ की आस। तपता सूरज जेठ मास मेंसूख रहे द्रुम-बेलत्राहि-त्राहि मच रही धरा परजीव रहे
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