बूँद मिली जब सिंधु में
बूँद मिली जब सिंधु में, मिटा बूँद का भान।मैं-तू का पर्दा गिरा, एक हुआ अरमान। नदिया बनकर चल पड़ी, मन
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Read Moreकलम हुई मजबूर जब, बिकने लगा विचार।आका की चौखट बनी, लेखक का दरबार॥ कलम उठी जो प्रश्न पर, कर देते
Read Moreभगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।देशप्रेम की ज्योति से, रोशन हो हर साँस।। माटी पर कुर्बान थे,
Read Moreजहाँ पर बीता मेरा बचपन, भूल गया अब उम्र है पचपन। नीम तले वो कंचे खेलना, अम्मा का वो रोटी
Read Moreबने संतान आदर्श हमारी, वो बातें सिखला दूँ मैं।सोच रहा हूँ जो बच्चा आये, उसका रूप, गुण सुना दूँ मैं।।
Read Moreचंचल बारिश अब आकरटीस दिल में जगा गईबिरहन फिर से मचल उठीनीर भी आग लगा गई। बैठी नदी के कूल
Read Moreकेवल करें क्यों आराधना?आओ मिल हम करें साधना।। आराधना में हमें, मिले मंत्र हैं।साधना में, सफलता का तंत्र है।विकास पथ
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