14 अगस्त: 1947 विभाजन दिवस
मानवता रोई थी जार जार जब हुआ देश का बंटवाराहिंसा भी चरम पर थी अपने भाई को बनाया था चारा
Read Moreमानवता रोई थी जार जार जब हुआ देश का बंटवाराहिंसा भी चरम पर थी अपने भाई को बनाया था चारा
Read More1-सीने में दिल धड़क रहा होभाव-भूमि अब तक हो भींगीकभी कभी दिल की देहरी परपांव पटकने का मन होताथोड़ी सी
Read Moreआज उजागर हो गई, मंदबुद्धि की सोच।देशद्रोह की बढ़ रही, मन में खूब खरोंच॥ मान नहीं राष्ट्रध्वज का, मन में
Read Moreभय दिखलाकर पाप का, माँगे दान अपार।ऐसे ढोंगी से बचो, तभी बचे संसार॥ पाप-पुण्य का डर दिखा, बाँधे मन की
Read Moreजिस देश की धरती करे, नमन स्वयं संसार।उस भारत को झुका सके, किसमें इतनी धार।। भारत माँ की गोद में,
Read Moreस्वतंत्र रहें, स्वछंद रहें हम।खुशी मिले या मिलते गम।अपना पथ, अपना निर्णय,परिणामों को स्वीकारें हम।नहीं किसी के अनुगामी हैं।लक्ष्य, कर्म
Read Moreसबसे पहले दहेज प्रथा का, तुझको कलंक मिटाना हैबहुओं की रक्षा करनी है, उनको जलने से बचाना हैतिल-तिल जलती बेटी
Read Moreसावन मनभावन आयो रे,हरियाली को संग लायो रे,खुशहाली के ढोल बजाता,बरखा दुल्हनिया लायो रे,सावन मनभावन आयो रे। सूखी तपती प्यासी
Read Moreतिरंगा लहराया है, गगन ने सर झुकाया है,आज़ादी का जश्न, हिंदुस्तान मुस्कुराया है।मंगल पांडे की ललकार,भगत सिंह की रफ़्तार,बापू की
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