गीत/नवगीत

गीत/नवगीत

कोचिंग संस्कृति के चौराहे पर

शिक्षा थी संस्कार की, ज्ञान-ज्योति का धाम।अब बाजारों में बिके, उसका पावन नाम।। विद्यालय के द्वार से, घटता अब विश्वास।कोचिंग

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