नेपाल की पीड़ा
धरती डूबी पर्वत कांपे, रोया सकल जहान है।मलबे में सब स्वप्न दब गए, सूने हुए मकान हैं। चीखों से काँपा
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Read Moreबीते हुए दिनों की यादेंमाटी के चूल्हे की बात। भुला नहीं पाए हम अब भीगर्म -गर्म रोटी का स्वादकढ़ी खरी
Read Moreसम्पूर्ण ब्रज में छा रहा मंगल अपारआया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार। देवकीनंदन श्री वसुदेव दुलारेजन्म से ही रहे उनके करतब
Read Moreमोर मुकुट शीश धरे श्यामल कृष्ण कन्हाई,यदुनंदन की मुरली की तान हर मन को भाई । वृंदावन की गलियों में
Read Moreसज गए हैं बप्पा फिर बाज़ारों मेंअब होगा मोल तोल खरीददारों में , कोई पूछेगा—कितने के हैं?कोई कहेगा—थोड़े कम कर
Read Moreछिपे, पहने कई लिबास।बात-बात पर देश का, करते हैं उपहास॥ राष्ट्रहितों को भूलकर, करते अपना काम।शब्दों से विष घोलते, करें
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