पुरुष की पीड़ा
समझ सका ना कोई पीड़ा, पुरुष के मन की, दो पाटों के बीच पिस रहे, पुरुष के मन की। अपनी
Read Moreसमझ सका ना कोई पीड़ा, पुरुष के मन की, दो पाटों के बीच पिस रहे, पुरुष के मन की। अपनी
Read Moreअपना मतलब है परम,बाकी सब बेकार सच्ची वाली मित्रता ,रोज रही हैं हार। साज नही वो सोहता,जिसके टूटे तार .रिश्ते वो
Read Moreखुद के भीतर झॉंक सको, तो झॉंको तो, सभी प्रश्नों के हल भीतर, तुम झांको तो। कौन है अपना कौन
Read More(1) भारत माँ का लाल हूँ, दे सकता हूँ जान। करता हूँ मन-प्राण से, मैं इसका यशगान। आर्यभूमि जगमग धरा,
Read Moreसावन मनभावन सखी झूला पड़ गया डार | झूँक मुरारी दे रहे, बैठी है ब्रज नार || मेंहदी चूड़ी झूलना
Read Moreजीवन है विपरीत अब, सब कुछ है प्रतिकूल। फूलों की बातें नहीं, चुभते हैं नित शूल।। रोज़ विहँसता झूठ अब,
Read Moreकौन पूछता योग्यता, तिकड़म है आधार । कौवे मोती चुन रहे, हंस हुये बेकार ।। परिवर्तन के दौर की, ये
Read Moreलेखनी मत करियो कुंठित कलम, गाय मनुज यश गान। मानव हित में लेखनी , वही लेखनी जान।।1।। राजनीति राजनीति
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