हाइकु
1 खिलते पुष्प, सुगंध चहुँ दिस, मन में हूक़ । 2 याद पिया की, लगी है फिर आने, बरसों बाद
Read Moreऋतु बसंत करें अभिनन्दन माँ शारदा का ! .. माँ वीणापाणि देती आशीष सदा ज्ञानार्जन का ! … झूमते बौर
Read Moreहाइकु (नव-दुर्गा)P शैलपुत्री माँ हिम गिरि तनया वांछित-लाभा। ** ब्रह्मचारिणी कटु तप चारिणी वैराग्य दात्री। ** माँ चन्द्रघण्टा शशि सम
Read Moreनवरात्रि के हाइकु 01 दक्ष नाशिनी बहुवर्णी देवि मां भव मोचनी। 02 ऐन्द्री कौमारी वाराही माहेश्वरी विशाला ग्राही। 03
Read Moreचन्द्रयान पर उतरना, एक कदम था दूर। किन्तु जरा सी चूक से, हुआ देश मजबूर।। — विफल हुए तो क्या
Read More01ः- अहं का खेल मुद्दे पाताल में हम हैं फेल। 02 :- तू- तू में-में ही बन लिया कर्तव्य अपनों
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