भजन/भावगीत

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नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की महागाथा : शक्ति, साधना और सृष्टि की दिव्य गाथा

पर्वतराज के आँगन में जब दिव्य प्रभा मुस्काई,सती ने गिरिराज-सुता बन पुनः धरा पर छवि पाई।वृषभवाहिनी, त्रिशूलधारिणी, कमल सुशोभित हाथ,माँ

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मां दुर्गा स्तुति

चिति चिता चिंता चित्रा,चंद्रघंटा चितरूपा,चामुंडा,हे दुर्गा,चंड-मुंड की विनाशिनी ।।सती साध्वी सत्ता सर्वविद्या सुंदरी सावित्री,शिवदूती,सत्या,माँ,सर्वदा नवघातिनी ।।सर्व शास्त्रमयी,सर्व असुर विनाशी,भाव्या,सुर सुन्दरी,जलोधरी,त्रिशूल

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माँ शैलपुत्री : शक्ति-साधना की प्रथम ज्योति

नवरात्रि के प्रथम दिवस पूजी जातीं माँ शैलपुत्री,पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जग की पालनहारी।वृषभ पर आरूढ़ होकर ‘वृषारूढ़ा’ कहलाती हैं

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मुस्कुरा रही मातारानी (राधेश्यामी छंद)

नौ दुर्गा का अवतार लिए, मुस्कुरा रही मातारानी,धूम मची है नवरात्रों में, गज सवार श्री मातु भवानी । इन शारदीय

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