मेहनती मोहन
शहर के पास ही एक गाँव था- जामगाँव। इसी गाँव में मोहन नाम का एक गरीब लेकिन मेहनती और ईमानदार
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Read Moreउन दिनों की है जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ता था। हमारे परिवार में सिर्फ चार प्राणी रहते थे। मम्मी-पापा,
Read Moreझंडा ऊंचा रहे हमारा, लगता सबसे एकदम न्यारा, तीन रंगों से सजकर ये झंडा, दिखता देखो कितना प्यारा। हरा रंग
Read Moreमुर्गी अंडा देती रोज,मुर्गा बाँग लगाता क्यों? मोर शुभंकर पक्षी है,किसको नाच रिझाता क्यों? साँप रेंग कर चलता है,पाँव न
Read Moreअम्मा चलें आज अमराई।झूलें झूला बहना – भाई।। नभ में घटा उमड़कर आई।हवा चली ठंडी पुरवाई।।यहाँ वहाँ छाया भी छाई।अम्मा
Read More“माँ…! बाबूजी बाजार जाएँगे तो अंग्रेजी की पुस्तक और गणित के लिए एक मोटी काॅपी ले आएँगे। बोल देना। मैंने
Read Moreलहराती पतंग झूम-झूम, नीले आसमां को चूम-चूम, बादलों संग इतराती, इधर-उधर, नाचे घूम-घूम।। साथियों संग गुनगुनाती, डोर संग सहर्ष बंध
Read Moreरामपुर में एक बहुत ही मेहनती तथा बुद्धिमान कुम्हार रहता था। नाम था उसका- दीनबंधु। एक बार दीनबंधु अपने बेटे
Read Moreअजय और सुमीत एक ही कक्षा के दो छात्र थे। सुमीत एक निर्धन परिवार का सीधा-सादा लड़का था जबकि अजय
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