बालकविता “खेतों में शहतूत उगाओ”
बालकविता “खेतों में शहतूत उगाओ”(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)—कितना सुन्दर और सजीला।खट्टा-मीठा और रसीला।।—हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।—शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत
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Read Moreसबसे प्यारी दोस्त किताबें। देती ज्ञान को धार किताबें। हर बच्चे के लिए जरूरी, दुनिया पूरी भरी किताबें।। पढ़ किताबें
Read Moreचंदा मामा रूप तुम्हारा मुझे लुभाया करता है | घटना- बढना निश दिन तेरा मुझ में अचरज भरता है |
Read Moreबालकविता “खीरे को भी करना याद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)—तन-मन की जो हरता पीरावो ही कहलाता है खीरा—चाहे इसका रस पी
Read Moreनर्मदा नदी के किनारे तीस हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले हुए शान्ति वन में राजा शेखर शेर और उसके तमाम
Read Moreरामू और नवनीत की दोस्ती की चर्चा पूरे शास्त्री बाग मुहल्ले में होती रहती थी। बचपन से एक ही स्कूल
Read Moreराजन के पापा ने दी साइकिल, स्कूल है जाता उसपर सवार। मस्ती करते वह नहीं है थकता, मिलता इससे खुशियां
Read More” ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो चुका है। मैंने पहले ही तुमसे कहा था कि हम यहाँ से दूसरे वन
Read Moreबालगीत “मन को बहुत लुभाते आम”—एक साल में आते आम।सबके मन को भाते आम।।—जब वर्षा से आँगन भरता,स्वाद बदलने को
Read Moreआओ वृक्ष -मित्र बन जाएँ। छाया देकर ताप मिटाएँ।। वृक्ष सदा हैं पर – उपकारी। हवा बहाते शीतल न्यारी।। वृक्षों
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