विश्व पर्यावरण दिवस – २०२५
आया यह कैसा प्रगति का दौरहर तरफ है बस शोर ही शोरबम -बंदूकों की गड़गड़ाहट सेछाया जगत में अंधियारा घनघोरआया
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Read Moreगीत गा रही वर्षारानी,आसमान शोभित है।बहुत दिनों के बाद धरा खुश,तबियत आनंदित है।। गर्मी बीती आई वर्षा,चार माह चौमासा।कभी धूप,तो
Read Moreप्रेम नहीं केवल है तुमसे, छाया तुम्हारी प्यारी है। साथ भले ही, नहीं रहो तुम, तुमसे हमारी यारी है।। वाद-विवाद
Read Moreखुद ही खुद के साथ रहेंगे नहीं किसी से प्रेम चाहिए, खुद ही खुद से प्रेम करेंगे। साथ में साथी
Read Moreमन का मौसम ठीक नहीं तो होठों पर भी गीत नहीं।अरसा हुआ हृदय के पथ से गुजरा कोई मीत नहीं।
Read Moreगर्मी निशदिन बढ़ती जाए,व्याकुल मन दिन रैन।हर पल मेरा मन घबराए, पाऊँ कहीं न चैन।। सकल सृष्टि की महिमा न्यारी,उचित
Read Moreसमाधान तुम खुद बन जाओ मानवता जब भटक रही हो, आगे बढ़ कर पथ दिखलाओ। कदम-कदम हैं, बिछी समस्या, समाधान
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