विवेकानन्द जयन्ती पर विशेष- क्यों? का नहीं, कर्म करने का अधिकार
स्वामी विवेकानन्द का कार्य अभी भी पूरा नहीं हुआ है। स्वामी जी की जयन्ती पर हम उनके सपनों को साकार
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Read Moreध्यान वर्तमान समय में बहु प्रयुक्त शब्द है। इसकी चर्चा केवल योग और आध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं चिकित्सां
Read Moreसनातन हिंदू संस्कृति का महापर्व है –महाकुम्भ, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव। सनातन संस्कृति की आस्था
Read Moreकिसी कवि ने क्या खूब कहा है –“गाँव की माटी को सूँघो,गंध को एक नाम दे दो।”एक मुस्कुराती सुबह दे
Read Moreअभी तक जितना पढ़ा है। मुझ जैसे अल्पज्ञ व अज्ञानी को अधिक अनुभव व ज्ञान भी नहीं है। पढ़ने का
Read Moreभारतीय दर्शन में जीवन को नश्वर कहा गया, उसके प्रति मोह न रखने का प्रबोध दिया गया, स्वर्ग और मोक्ष
Read Moreसमझने वाले बिना समझाये भी समझ जाते हैं और नहीं समझने वाले समझाने से भी नहीं समझते. यह दुनिया ऐसी
Read Moreबहुत बार पुछा जाता है कि जब हर ग्रंथ का कोई लेखक होता है तो अपने वेदों का लेखक कौन
Read Moreश्रीमद्भगवद्गीता पर सैकड़ों प्रसिद्ध तथा सैकड़ों अप्रसिद्ध अनुवाद, व्याख्याएँ, टीकाएँ,भाष्य आदि पचासों भाषाओं में हमारे समक्ष उपलब्ध हैं! तुलसीदास की
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