इतिहास

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वर्तमान में शिवा जी महाराज की प्रासंगिकता

छत्रपति शिवाजी महाराज जी जितने प्रासंगिक सोलहवीं शताब्दी में थे उतने ही प्रासंगिक आज भी हैं, जिस प्रकार की चुनौतियों

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चार सौ वर्ष प्राचीन अप्रकाशित पाण्डुलिपि : रामहनु कथा रास

आचार्य श्री देवनन्दि दिगम्बर जैन स्वाध्याय एवं शोध संस्थान, नैनागिरि में एक लगभग चार सौ वर्ष प्राचीन पाण्डुलिपि (हस्तलिखित ग्रन्थ)

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“भारत है हिंदू राष्ट्र” विचार के प्रतिपादक- डा. हेडगेवार

भारत के सबसे बड़े समाजसेवी व राष्ट्रभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के संस्थापक डा. केशवराव  बलिराम हेडगेवार का जन्म युगाब्द

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अरसीकेरे कर्नाटक का भव्य प्राचीन सहस्रकूट मंदिर

कर्नाटक का अरसीकेरे एक प्रमुख जैन केंद्र था। कहा जाता है कि यहाँ होयसलाओं के दौरान कई जैन मंदिर थे।

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नैनागिरि शिल्पकला में आभरण

नैनागिरि शिल्पकला में देवी-देवताओं व परिकर के पात्रों को बहुत सूक्ष्मता और उत्कृष्टता से आभरणों से अलंकृत किया गया है।

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वतर्मान में शिवा जी महाराज की प्रासंगिकता:-

छत्रपति शिवाजी महाराज जी जितने प्रासंगिक सोलहवीं शताब्दी में थे उतने ही प्रासंगिक आज भी हैं, जिस प्रकार की चुनौतियों

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