व्यंग्य – श्रद्धांजलि देने की होड़ में
लोगों को बहुत जल्दीबाजी है। सब लोग लबर- लबर करने में लगे हैं। न्यूज और व्यूज पाने की। अपडेशन की
Read Moreलोगों को बहुत जल्दीबाजी है। सब लोग लबर- लबर करने में लगे हैं। न्यूज और व्यूज पाने की। अपडेशन की
Read Moreएक बाबा जी के विचार सुनने को मिले। सचमुच उनको सुनकर दिल गदगद हो गया। वो आदमी और आदमी में
Read Moreदीवाली पर जैसी व्यापारी की तैयारी होती है वैसी ही होली पर व्यंग्यकार की तैयारी होती है। होली व्यंग्य वालों
Read Moreविचारणीय प्रश्न यह है कि उल्लू सदैव टेढ़ा ही क्यों होता है,जिसे सीधा करने की आवश्यकता पड़ जाती है ?
Read Moreसबका साथ सबका विकास! बटोगे तो कटोगे! एक रहो सेफ रहो! जैसे जुमलों के बीच एक नये लल्ला का जन्म
Read Moreबहुत समय हुआ जब से वे लोगों को प्रणाम करना भूल गए हैं। इसके पहले वे बहुत व्यहवारिक थे। हमेशा
Read Moreभाई भरोसे लाल अपने बच्चों के पास विदेश पहुंच गए । जब वे विदेश पहुंच ही गए तो वह वहां
Read Moreवे हिंदी साहित्य के बहुत बड़े संपादक जी हैं। उन्होंने अब तक पचास साझा काव्य संग्रहों और पचास पुस्तकों का
Read Moreभाई भरोसे लाल हमारे मोहल्ले के नामी आदमी है। नामी इस लिए हैं कि उन्हें बस नाम से मतलब चाहे जैसे
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