धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

शनिदेव के नाम पर समाज का शोषण

आज शनि जयंती है, लोग शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए तेल आदि दान करते हैं. न जाने कितने लोग शनि देव के नाम पर पुजारियों पंडो के जाल में फंस कर अपना धन और समय दोनों बर्बाद कर देते हैं । जैसे जैसे विज्ञानं तरक्की कर रहा है देश में अन्धविश्वास और […]

ब्लॉग/परिचर्चा हास्य व्यंग्य

स्वर्ग में धरना

स्वर्ग के विश्वसनीय एकाउंटेन्ट चित्रगुप्त व्हाट्स एप पर इंद्र से कुछ निर्देश ले रहे थे, तभी मैं नारायण-नारायण करते हुए प्रकट हुआ. “कैसे आना हुआ मुनिवर? इस बार के पृथ्वी लोक का टूर कैसा रहा? क्या क्या किया? कहाँ कहाँ घूमे? अब आगे का क्या प्लान है और ये आपके सर पे टोपी कैसी है? […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

मोदी जी के मंत्रिमण्डल के पदों पर सट्टेबाजी !

हमारा ऐसा अनुमान है कि यह पहली बार हुआ है जब कोई प्रधान मंत्री किसको कौन सा पद देंगे, उस पर सट्टेबाज़ सट्टा लगाते हों, उसका जिक्र व्यापकता से देश के अनेक टी वी चैनल करते हों ! क्या मोदी जी के वरिष्ठ भक्तों  को इसकी जानकारी नही मिली है? क्या उन सट्टेबाजो और उसको […]

इतिहास

पौराणिक प्रलय- मिथक या इतिहास? (दूसरी क़िस्त)

मित्रो, आचार्य चतुरसेन की पुस्तक ‘वय: रक्षामः’ पर आधारित आपने मेरे पिछले लेख में पढ़ा कि पौराणिक प्रलय क्या थी. अब आगे पढ़िए। हालांकि प्रलय ने सभी कुछ तहस-नहस कर दिया था परन्तु फिर भी मनु द्वारा बसाई सुषा नगरी, जो कि मन्युपुरि कहलाती थी, उसके कुछ भाग जलमग्न नहीं हुए थे। फिर भी नगरी […]

इतिहास

पौराणिक प्रलय – मिथक या इतिहास ? (पहली क़िस्त)

दुनिया के सभी प्रमुख धर्म ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में ‘प्रलय’ आई थी। इस प्रलय का हिन्दू धर्म ग्रंथों में ऐसा वर्णन है कि मनु ने एक बेड़ा बनाया और उसमें दुनिया के सभी जीव जंतुओं को एकत्र किया और उन्हें प्रलय के प्रकोप से बचाया। बाद में इन्हीं बचे हुए […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (सपने खूब मचलते देखे)

सपनीली दुनियाँ मेँ यारो सपने खूब मचलते देखे रंग बदलती दूनियाँ देखी, खुद को रंग बदलते देखा सुविधाभोगी को तो मैंने एक जगह पर जमते देख़ा भूखों और गरीबोँ को तो दर दर मैंने चलते देखा देखा हर मौसम में मैंने अपने बच्चों को कठिनाई में मैंने टॉमी डॉगी शेरू को, खाते देखा, पलते देखा […]

कविता

कविता – ठहरा प्रवाह

आधुनिक युग में नदियाँ भी आ गयी हैं सीमाओं की चपेट में जरुरतमन्दों ने क्यूँ कर रोक दिया है प्रवाह नदी का प्रकृति के विरुद्ध झेलती अत्याचार ये नदियाँ सूखकर इतिहास के पन्नों पर दर्ज करवाती रही हैं मशीनी मानव का अंधकारमयी भविष्य एक दिन इन्हीं के सूखे किनारे बैठ हम तलाश करेंगे एक चारागाह […]

राजनीति

सोनिया गाँधी का तत्व ज्ञान

चुनाव परिणाम आने के पूरे 8 दिन बाद कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गाँधी को तत्व ज्ञान हो गया है कि उन्होंने जनता का मूड भांपने में गलती की. मैडम ने यह नहीं बताया कि जिस बात को देश का बच्चा-बच्चा कई साल पहले से जानता है वह ज्ञान उन्हें इतनी देर से क्यों प्राप्त हुआ? […]

कविता

शौकीन

दर्द में डूबी हुई एक तस्वीर हूँ मैं ! टूटी हुई है हर एक कड़ी वो ज़ंजीर हूँ मैं ! आशाओं की डाल से टूटा एक पत्ता तेरे प्यार के दर्द का शौकीन हूँ मैं ! मंज़िल से भटका ठोकरें खाता फिरता हूँ परछाईयों के आगोश में तुझे ढूढ़ने का शौकीन हूँ मैं ! तुम्हारा […]

राजनीति

मुलायम सिंह का दर्द

उ.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री (धरतीपुत्र, नेताजी) मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी की इन चुनावों में बड़ी दुर्दशा हुई है. भले ही वे स्वयं दोनों स्थानों (मैनपुरी और आजमगढ़) से जीत गए, लेकिन शेष में से बहु, भतीजों के आलावा कोई चुनावी वैतरणी पार नहीं कर पाया, यह उनके दुःख का सबसे बड़ा कारण है. […]