Monthly Archives: May 2014



  • अनिच्छा से सृजित

    अनिच्छा से सृजित

    अनिच्छा से सृजित गर्भ में पनपा कोई भ्रूण महज़ एक रक्त का लोथरा रहा होगा जब प्रमाणित कर कुछ पैसों से अजश्र रक्त-श्राव कराकर उसकी बेचैन आँखों में झाँक कर बोला गया होगा सॉरी माँ बहा...

  • रिश्ता

    रिश्ता

    हर एक सूरत मुझे अब तो तेरी सुरत सी दिखती है देखता हूँ जिधर भी मैं तेरी मूरत सी दिखती है कभी दिंन के उजालों में रात के अंधेरों में बरसती बारिश की बूंदों में बसंत...


  • स्वर्ग में धरना

    स्वर्ग में धरना

    स्वर्ग के विश्वसनीय एकाउंटेन्ट चित्रगुप्त व्हाट्स एप पर इंद्र से कुछ निर्देश ले रहे थे, तभी मैं नारायण-नारायण करते हुए प्रकट हुआ. “कैसे आना हुआ मुनिवर? इस बार के पृथ्वी लोक का टूर कैसा रहा? क्या...