Monthly Archives: July 2017


  • जग का सूरज

    जग का सूरज

    शाम हुई थका सूरज पहाड़ो की ओट में करता विश्राम गुलाबी, पीली चादर बादल की ओढ़े पंछियो के कोलाहल से नींद कहाँ से आये हुआ सवेरा नहा कर निकला हो नदी से पंछी खोजते दाना-पानी सूरज...


  • गज़ल

    गज़ल

    मैं ये जाहिर नहीं करता कि मैं सब याद रखता हूँ, पहले भूल जाता था मगर अब याद रखता हूँ भरोसा उठ गया जबसे मेरा इंसानियत पर से, महफिल में हर इक बंदे का मजहब याद...


  • साहिल / किनारा

    साहिल / किनारा

    साहिल को क्या मालूम कि कितनी कश्तियाँ डूबीं , कितने अरमान जले कितने ही साहिल पर आपस में मिले समंदर के किनारे पर , एक – दूसरे के हो गये पर , वहीं वे अपने प्राणों...



  • बचपन के वो दिन

    बचपन के वो दिन

    मुझे याद है बचपन के वो दिन कागज की कश्ती बनाकर पानी मे तैराना, बरसात के दिनों मे उमडते घुमड़ते बादलों के बीच कल्पना के घोड़े दौड़ाना, मनचाहे चरित्रों को तलाशना, हाँ मुझे याद है। मुझे...

  • नागपंचमी

    नागपंचमी

    सुबह मेरे जागते ही पत्नी मुझे देखकर मुस्कराई मेरे पास आई ! बोली मुंह – हाथ धो लो फिर मैं आती हूं आपको कुछ पिलाती हूं ! थोड़ी देर में एक प्याला लिए वो मेरे पास...