कहानी

सुनो, तुम मुझसे झूठ तो नहीं बोल रहे

घर की बालकनी की खिड़की खोली बाहर का दृश्य देख मुंह से निकल पड़ा – देखो चीकू के पापा कितना मनोरम दृश्य है । रोज की तरह रजाई ताने बिस्तर से चीकू के पापा ने कहा – पहले चाय तो बना लाओं । और सुनों -अख़बार आगया होगा वो भी लेती आना ।दुनिया में कई […]

कविता

जग का सूरज

शाम हुई थका सूरज पहाड़ो की ओट में करता विश्राम गुलाबी, पीली चादर बादल की ओढ़े पंछियो के कोलाहल से नींद कहाँ से आये हुआ सवेरा नहा कर निकला हो नदी से पंछी खोजते दाना-पानी सूरज के उदय की दिशा में सूर्य घड़ी प्रकाश बिना सूनी जल का अर्ध्य स्वागत हेतु आतुर हो रही हथेलिया […]

कविता

समय बड़ा बलवान

समय बड़ा बलवान ———————— समय बड़ा बलवान रे साथी, समय……… देखो समय – समय के खेल निराले समय पे छलके मदिरा के प्याले समय पे बीत गई वो हंसी जवानी प्यास लगी पर मिला नहीं समय पे पानी || परिवर्तन है नाम समय का रे साथी सुंदर – सुंदर मुखड़े समय पे सूखे – पिचके […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

मैं ये जाहिर नहीं करता कि मैं सब याद रखता हूँ, पहले भूल जाता था मगर अब याद रखता हूँ भरोसा उठ गया जबसे मेरा इंसानियत पर से, महफिल में हर इक बंदे का मजहब याद रखता हूँ घुमा कर बात करने के चलन जबसे बढ़ा तबसे, मैं लफ्ज़ों सेे ज्यादा उनका मतलब याद रखता […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म राजनीति

ऋषि दयानन्द की ईश्वर से स्वराज्य, साम्राज्य व चक्रवर्ती राज्य की प्राप्ति की प्रार्थना व चर्चा

ओ३म् ऋषि दयानन्द ने अपने साहित्य में अनेक स्थानों पर ‘साम्राज्य’ व ‘चक्रवर्ती–राज्य’ की ईश्वर से प्रार्थना व मांग की है। राज्य वह होता है जिस पर किसी राजा व राज्याधिकारी का शासन व नियंत्रण होता है। यदि कई राज्यों को मिला दिया जाये तो उसे एक देश विशेष कह सकते हैं। ऐसे अनेक देशों […]

कविता

साहिल / किनारा

साहिल को क्या मालूम कि कितनी कश्तियाँ डूबीं , कितने अरमान जले कितने ही साहिल पर आपस में मिले समंदर के किनारे पर , एक – दूसरे के हो गये पर , वहीं वे अपने प्राणों से हाथ धो गये । यूँ तो साहिल जानता है औरों का दर्द तभी तो इशारे के रूप में […]

कविता

राष्ट्र कल्याण, कार्य महान

सुधार राष्ट्र का करना, तो सबको प्रेम से रहना। इसी प्रेम से दुनिया तो; सभी का मानती कहना।। हमारे इन राष्ट्रों में विरोधी, प्रेम की जात। जाति के भेद से होती; विकास करने में रात।। इन्हीं जाति के विघ्नों से, रुकना कार्य राष्ट्र का। गाना पड़ता है हमको; लगाना पड़ता है नारा।। सभी जब इन्सान […]

लघुकथा

पत्नी में माँ का रूप देखा

वैसे तो हर नारी मॉँ होती ही है ,पर स्वयं की पत्नी में मॉँ का रूप दिखना बहुत बड़े सौभाग्य का विषय है ! हालांकि इसके पूर्व भी अनेक बार पत्नी में मैंने ममत्व देखा है,पर मैं केवल कल के वाकये को ही आधार बनाकर अपनी बात कह रहा हूं ! कल सुबह कॉलेज जाने […]

कविता

बचपन के वो दिन

मुझे याद है बचपन के वो दिन कागज की कश्ती बनाकर पानी मे तैराना, बरसात के दिनों मे उमडते घुमड़ते बादलों के बीच कल्पना के घोड़े दौड़ाना, मनचाहे चरित्रों को तलाशना, हाँ मुझे याद है। मुझे याद है फर्श पर पानी का फैलाना, छप-छप करना, माँ का गुस्सा, दादी का प्यार बहन का दुलार, सब […]

कविता

नागपंचमी

सुबह मेरे जागते ही पत्नी मुझे देखकर मुस्कराई मेरे पास आई ! बोली मुंह – हाथ धो लो फिर मैं आती हूं आपको कुछ पिलाती हूं ! थोड़ी देर में एक प्याला लिए वो मेरे पास आई कुछ कुछ इठलाई ! मैं चाय का प्याला समझ प्रसन्न हो गया उसके आसन्न हो गया ! पर […]