समाचार

साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उत्थान मंच कोरबा द्वारा काव्यगोष्ठी का आयोजन

मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में साहित्यिक मंच : कोरबा द्वारा नव वर्ष व विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष में दिन रविवार दिनांक १०.०१.२०२१ को आनलाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदेश के साथ साथ कोरबा अंचल के विभिन्न क्षेत्रों से साहित्यकार शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप […]

कविता

गुमान न करना

हैसियत का गुमान करने वाले, जो कभी राजा हुआ करते थे। आज देखो तक़दीर ने करवट ली, और वह रंक में तब्दील हो चले। अपनी राजशाही पर गुमान था, खो दी उसने सारी सुख सुविधाएं। जब ग़रीबी का उपहास किया, तब किस्मत ऐसे मोड़ लाए। जिसको करता रहा तिरस्कृत, आज वह है राज-करता अंकित। जिसने […]

अन्य लेख लेख

🌹आभूषण🌹

आभूषण मनुष्यों का अभिन्न मित्र है। इनके धारण करने से स्त्री हो या पुरूष दोनों की खूबसूरती बढ़ जाती है। जिस प्रकार स्त्रियाँ बिंदिया, हार, कर्णफूल, मुंद्री, कमरबन्द और बाजूबंद, इत्यादि धारण करती हैं। उसी प्रकार पुरूष भी मुंद्री, गले मे चैन, इत्यादि धारण करते हैं। किन्तु मनुष्यता का आभूषण सदाचार को माना गया है। […]

सामाजिक

😞पीड़ा😞

एक लड़की जब स्त्री जीवन में प्रवेश करती है। तो उसे उसके नव जीवन से अनेक अभिलाषाएं और उम्मीदें होती हैं। जब तक वह लड़की रहती है माता पिता के सपनों को जीती है। पर जैसे ही व्याह के पश्चात स्त्री जीवन में प्रवेश करती है, सब कुछ परिवर्तित हो जाता है। अपने पति (जीवनसाथी) […]

कविता पद्य साहित्य

🌹इंतज़ार🌹

इंतज़ार है मुझे आज भी उस पल का जब चुपके से वो आएंगे और हौले से इन हाथों को थामेंगे और फ़िर कहेंगे अपने दिल की बात जो बरसों तक छुपाए रक्खा था उन्होंने अपने अनकहे लफ्ज़। मेरी अखियन यूँ बन्द करके आते ही बयाँ कर देंगे अपने दिल में छुपे जज़्बातों को ” ओ […]

सामाजिक

मधुर वाणी

“ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोये | औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ||” यह एक प्रकार का वशीकरण है। जिसकी वाणी मीठी होती है, वह सबका प्रिय बन जाता है। प्रिय वचन हितकारी और सबको संतुष्ट करने वाले होते हैं। फ़िर लोगों में मधुर वचन बोलने में दरिद्रता कैसी? वाणी के द्वारा कहे […]

कविता

🌹दो चाँद🌹

एक चाँद आसमान का, जिसके दीदार से व्रत खुले। दूजा चाँद हर वह सुहागिन है, जिसने इतना सुंदर रूप धरा। वह चाँद नज़र आए केवल, केवल जब होती है रात। यह चाँद नज़र आए सुहाना, जब हो दिलबर का साथ। 🌹✍️🌹

कविता

व्यथा : माँ की

एक माँ की व्यथा कोई न जाने, जाने भी गर तो क्यों न माने, माँ देती जन्म पुरुष और स्त्री को, जिनका बाल रूप है बालक-बालिका, गूँजती हैं घर में किलकारियाँ, दोनों ही होते सन्तान हैं। क्यूँ बालिका बनती भय की काया, बालक बनता हवस का पुजारी, क्यों माँ की ममता को शर्मिंदा करते, क्यों […]

कविता

स्त्री

स्त्री ईश्वर की वह खूबसूरत रचना है, जिसके अंतर्मन की खूबसूरती, केवल उसे ही दर्शित होती है, जो स्वयं ही एक शिल्पकार है, जिसे हर एक अंग, हर एक भाव, उस देवी की अद्भुत प्रतिबिम्ब सा, प्राकृतिक सौंदर्य समान दिखता है। स्त्री की रचना जिस ईश्वर ने की, उसने इसे एक ऐसा रूप दिया, अद्भुत […]