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  • नसीब

    नसीब

    “मेमसाहब दस रूपये दो ना कुछ सुबह से नहीं खाया बड़ी भूख लगी है।” सड़क पर भीख माँगता हुआ एक सात साल का बच्चा तरसती निगाहों से। लीना ने गाड़ी एक कोने में करी और बच्चे...

  • अनोखी राजनीति

    अनोखी राजनीति

      शब्दों के तीर चलाते, बाणों की वर्षा करते, आते चार साल बाद करने मानवता के मन का शिकार, देखो-देखो वे कैसे हैं मतलबी शिकारी ? दूर तक बजाते जाते अपनी ढपली अपना राग, हर किसी...

  • माँ का ऋण

    माँ का ऋण

    माँ तूने किये हैं इतने उपकार मुझपर, जिसका ना हिसाब कभी रख पाऊँगी, चाहे जीवन भर कर लूँ सेवा मैं तुम्हारी, फिर भी ना कभी यह ऋण तेरा चुका पाऊँगी।। सारा बचपन तेरी गोद में बीता,...

  • ज़िद्दी परिंदा इंसान

    ज़िद्दी परिंदा इंसान

      “उम्मीदों से बँधा एक ज़िद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उम्मीदों से है और ज़िंदा भी उम्मीदों पर है।” कैंसर अपने आख़िरी पड़ाव पर पहुँच गया था परंतु रामशरण जी अभी भी इसी उम्मीद...

  • नारी मतलब निरंतर बढ़ती चलना

    नारी मतलब निरंतर बढ़ती चलना

    कभी माँ बनकर जन्म दिया, कभी बहन बनकर राखी बाँधी, कभी सुहागन बनकर घर बनाया, कभी पुत्री बनकर गौरवान्वित करवाया। तुझ में शक्तियाँ छुपी अपार, स्वयं को पहचान और आगे बढ़, ना कर गुमान कुछ छूट...

  • नया ज़माना

    नया ज़माना

    “आज़ क्या खाना बनाने वाली नहीं आयेगी?” सासु माँ बहू विभा से पूछती हुई रसोई से बाहर आती हैं। “नहीं आज रविवार की छुट्टी जो है माँ जी।” बहू ने सहज़ता से ज़वाब दिया। “इस दिन...

  • रंगो का त्योहार होली

    रंगो का त्योहार होली

    इधर भी रंग, उधर भी रंग, जिधर देखूँ रंग ही रंग, हर किसी के ऊपर छाया रंगों का त्योहार। पूछे जब कोई किसी से कुछ क्वेश्चन, तब चारों ओर से एक ही आवाज़ आये, आज़ है...

  • अंतर्मन की पुकार

    अंतर्मन की पुकार

    दोनों भक्त मंदिर प्रांगण में खड़े थे. पहला कुछ देर तक मंदिर की भव्यता और मूर्ति की सौम्यता को निहारने के बाद बोला, “इसके निर्माण में मैंने रात-दिन एक कर दिये. पिछले दिनों यह नगाड़ा सेट...

  • वजह

    वजह

    धोखेबाज़ “नवीन अब हमें बड़ा घर ख़रीदना चाहिये क्योंकि इसमें तो चलना भी दूभर हो रहा है।” नीरू चाय का कप देते हुए कहती है। “क्यों? क्या हुआ? अभी तो सब ठीक चल रहा था फिर...

  • वतन का ख़ून 🇮🇳

    वतन का ख़ून 🇮🇳

    मैं हिंदू हूँ या मुस्लिम हूँ, पर भारत की वासी हूँ, बंद करो तकरार मंदिर-मस्जिद का अब प्यारे, गीत वतन में गाती हूँ।। ख़ून बहे चाहे हिंदू का, या मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई का, है वह ख़ून...