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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ए दर्द मुझे बाहों में ले मैं तुझसे लिपटकर सो जाऊंतेरी आगोश में यूं बिखरूं  मैं कतरा कतरा हो जाऊंकब खुदसे खुदकी बात करूं ना महफिल है ना तनहाई ऐसे आलम में डरती हूं कहीं खुद से...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरे दिल से मोहब्बत का जनाजा आज निकलेगा मुझे मालूम है मुझसे संभाले दिल ना संभलेगा किया है ये फैसला मैंने मोहब्बत छोड़ देंगे हम बना लेंगे यू पत्थर दिल न फरियादों से पिघलेगा मुझे जिसने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हंसाती है रुलाती है हमेशा आजमाती है जिंदगी है बड़ी संगदिल मगर जीना सिखाती है जब दर्द की हद हो जुवां खामोश हो जाए दबा कर आह सीने में अश्क पीना सिखाती है। हजारों बार टूटा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    छलक जाती हैं याद करके ये तुम्हें अक्सर प्यार इन आंखो से छुपाया न गया। बात आकर कहीं रुक जाती है कहते कहते हाल ए दिल होठों से बताया न गया। बड़ी खामोशी से तकती हैं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बड़े नादा है वो इतना भी जानते ही नहीं किसीके दिल में यूं ही जगह नहीं मिलती। शम्मा जलने का कुछ तो कोई मतलब है बेवजह रात भर जल के ये नहीं जलती। मुझे उम्मीद है...


  • ग़ज़ल 2

    ग़ज़ल 2

    जुबां ने बात बहुत कर ली है मगर कुछ तो खामोशियों को कहने दो। अभी सीने में ये सांस चलती है अभी धडकन को दर्द सहने दो। करेंगे क्या आंखों में समंदर  ये आज बह जाए...

  • ग़ज़ल 1

    ग़ज़ल 1

    यहां लगता नहीं है दिल अपना आओ हम दोनों कहीं और चलें। जहाँ खुशबू वफा की आती हो जहां चाहत के रोज फूल खिलें। प्यार ही प्यार हो जिस दुनियां में जहां नफरत लिये न लोग...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये प्यार एक दिन मुझसे मेरी जान मांगेगा ग़म देकर मुझको ये मेरी मुस्कान मांगेगा। खामोशियों की हथकड़ी जब दिल से टूटेगी ये सिलसिला दिल में कोई तूफान मांगेगा। खुद से बिछड़ के हम खो जाएंगे...

  • ग़ज़ल-2

    ग़ज़ल-2

    इन आंखों में माना समंदर छुपा है छुपेगी कहां दिल की ये बेकरारी । तू फिर सितम पे सितम आजमा ले के अब दर्द सहना है आदत हमारी। खुद से निकल तेरे दिल में रहे बस...