गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुझे न दौलत की जुस्तजू है न तख्त ओ ताज की आरजू है फकीर हूं मैं फकीर दिल है यूं फकीरी में साथ चल सकोगे। के सीखा है हमने मुस्कुराना मुझे न गम ना खुशी की परवाह मेरी जिंदगी है धूप छाया क्या ऐसे मौसम में ढल सकोगे। यूं दरबदर हम भटक रहे हैं न […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये कुदरत का कहर है या किस्मत का असर है कोई दीवार न छत है लोग कहते हैं ये घर है । कोई बहार इस तरफ कभी नहीं आती बदल रहा है जहां मुफलिसी नहीं जाती जल रही है जिंदगी रेत सी तो जलने दो छत नहीं है मुझको बरसात का डर है। कितना मासूम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तू है आसमा और मैं हूं ज़मीं तेरा मेरा मिलन होना मुश्किल है। मैं सागर किनारे पड़ी रेत हूं मेरी किस्मत में ना कोई साहिल है। क्यों इल्जाम दें जहां में किसीको मेरा दिल ही मेरे दिल का कातिल है। वह ना सही उनके गम तो मिले हैं उनकी यादों का हक हमको हासिल है। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सावन की बरसातों में प्रेम का अंकुर फूट न जाए एक बेचैनी सी है मन में धैर्य का धागा टूट न जाए। ये कैसा अहसास है जिसमें बिना डोर हम बंध बैठे प्रेम विवष कर मन मेरा कोई मुझसे लूट न जाए। तू है तारा नील गगन का मैं तिनका कंकर माटी कैसे तुमको छू […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये सोंच के दर पे आए थे अपनों से बगावत ठीक नहीं हंस भी ना सकूं रो भी न सकूं इतनी भी मोहब्बत ठीक नहीं। मत होश गवा ए दिल अपना कोई साथ न देने आएगा पा भी ना सकूं खो भी न सकूं इतनी भी चाहत ठीक नहीं। खुदा बनाया सजदा कि वह पत्थर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये सोंच के दर पे आए थे अपनों से बगावत ठीक नहीं हंस भी ना सकूं रो भी न सकूं इतनी भी मोहब्बत ठीक नहीं। मत होश गवा ए दिल अपना कोई साथ न देने आएगा पा भी ना सकूं खो भी न सकूं इतनी भी चाहत ठीक नहीं। खुदा बनाया सजदा कि वह पत्थर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मैं हूं मुजरिम तो मुझे हक से सजाएँ दे दो वर्ना बाहों मे अपनी मुझको पनाहें दे दो। बाद मरने के दुआओं से ना जिंदा होंगे अभी जिंदा हूं तो दो-चार दुआएं दे दो। मैने कब तुमसे आसमा या जमीं मांगी है अपना समझो तो मुझे अपनी वफाएं दे दो। जी में आता है जी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जुदा तुमसे नही हूं सुन तेरी परछाईं हूं मैं गुजरती है तुम्हें छू कर वही पुरवाई हूं मैं। तुम्हारे दिलकी डोली मे ये दुल्हन उतरती है तेरी धड़कन में बजती है वही शहनाई हूं मैं। छुपकर अकेले में जिसे तुम याद करते हो जिसे तुम तन्हा कहते हो तेरी तन्हाई हूं मैं। इश्क के बीज […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बिन तेरे हमको जीना गवारा नहीं , मैं कैसे यह मान लूं तू हमारा नहीं। हर सदा होके गुजरी तेरे रुबरु हमने आवाज देके पुकारा नहीं। थाम लो हाथ तुम भवंर तक चलो डूब जाओगे दिल वो सिकारा नहीं। हर नजर वार दी तुम पे इस कदर बाद तेरे किसी को निहारा नहीं। रंजिशें लाख […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दुनिया है पास फिर भी तेरा इंतजार है आओगे एक दिन तुम मुझे ये ऐतबार है। लब साथ नहीं देते कुछ तुमसे कह सकूं धड़कन को छूके देख लो दिल बेकरार है। हम जिसपे मर मिटे है उसको खबर नहीं दिल चीज क्या है अबतो ये जां निसार है। शिकवा नहीं है तुमसे न तुमसे […]