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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    छलक जाती हैं याद करके ये तुम्हें अक्सर प्यार इन आंखो से छुपाया न गया। बात आकर कहीं रुक जाती है कहते कहते हाल ए दिल होठों से बताया न गया। बड़ी खामोशी से तकती हैं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बड़े नादा है वो इतना भी जानते ही नहीं किसीके दिल में यूं ही जगह नहीं मिलती। शम्मा जलने का कुछ तो कोई मतलब है बेवजह रात भर जल के ये नहीं जलती। मुझे उम्मीद है...


  • ग़ज़ल 2

    ग़ज़ल 2

    जुबां ने बात बहुत कर ली है मगर कुछ तो खामोशियों को कहने दो। अभी सीने में ये सांस चलती है अभी धडकन को दर्द सहने दो। करेंगे क्या आंखों में समंदर  ये आज बह जाए...

  • ग़ज़ल 1

    ग़ज़ल 1

    यहां लगता नहीं है दिल अपना आओ हम दोनों कहीं और चलें। जहाँ खुशबू वफा की आती हो जहां चाहत के रोज फूल खिलें। प्यार ही प्यार हो जिस दुनियां में जहां नफरत लिये न लोग...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये प्यार एक दिन मुझसे मेरी जान मांगेगा ग़म देकर मुझको ये मेरी मुस्कान मांगेगा। खामोशियों की हथकड़ी जब दिल से टूटेगी ये सिलसिला दिल में कोई तूफान मांगेगा। खुद से बिछड़ के हम खो जाएंगे...

  • ग़ज़ल-2

    ग़ज़ल-2

    इन आंखों में माना समंदर छुपा है छुपेगी कहां दिल की ये बेकरारी । तू फिर सितम पे सितम आजमा ले के अब दर्द सहना है आदत हमारी। खुद से निकल तेरे दिल में रहे बस...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रिश्तों के लिए खुदको बदलते चले गए शोला थे मोम बनके पिघलते चले गए। आह से वाह की तासीर कम न हो कहीं खामोशियों की आग में जलते चले गए। ये उम्मीद का धागा जब टूटा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये न सोचो कि हम पराए हैं तेरी खातिर जमी पे आए हैं। एक पल के लिए करीब तो आ तेरी खातिर वफा के साए ह़ै। छेड़ कर तार यू़ं मेंरे दिल के दर्द इस दिल...

  • ग़ज़ल 2

    ग़ज़ल 2

    दिल से दिल की लगी छुपाने के लिए ज़ख़्म ए दिल छुप छुप नहीँ धोता कोई । ख्वाब ने नींद को खुलने न दिया शायद वर्ना इस तरह इस कदर नहीँ सोता कोई। जब तलक दिल...