Category : संस्मरण

  • मेरी कहानी-12

    स्कूल हम रोज़ाना जाते थे और स्कूल खुलते ही स्कूल की एक खुली जगह पर एकत्र हो जाते। हर क्लास की अपनी अपनी लाइन होती। हर रोज़ दो हुशिआर लड़कों को सारे स्कूल के आगे खड़े...




  • मेरी कहानी – 10

    मेरी बहन मुझ से तीन वर्ष बड़ी थी और क्योंकि लड़किओं के लिए स्कूल होता नहीं था तो उसने  घर में  रहकर ही माँ से पंजाबी सीख ली और जल्दी ही सिख धर्म की किताबें पढ़ने लगी। क्योंकि...

  • आज

    आज

    आज 20/3/2015 सुबह सुबह की वार्तालाप ….. इसी माह माँ की पुण्यतिथि थी न …. किस दिन थी ….. हाँ थी तो …. किस डेट को ….. अच्छा ये बताइए …. आज क्या है ….. आज...


  • मेरी कहानी-8

    इन पीपलों के नज़दीक जो खूही थी वह मुसलमानों की थी। कभी कभी वे कोई त्योहार मनाते और गुड़ वाले चावल बांटते जिसको वोह निआज़ बोलते थे। हालांकि हमें उन से कोई खाने की चीज़ लेने...


  • मेरी कहानी – 6

    मेरी कहानी – 6

    लूट मार के बाद गाँव में कुछ दिन शांत रहे, लेकिन अब और अजीब बातें  सुनने को मिलने लगीं। लोग बातें कर रहे थे कि पाकिस्तान से एक गाड़ी आई थी  जो हिन्दू और सिखों की लाशों से...