Category : संस्मरण

  • मेरी कहानी-8

    इन पीपलों के नज़दीक जो खूही थी वह मुसलमानों की थी। कभी कभी वे कोई त्योहार मनाते और गुड़ वाले चावल बांटते जिसको वोह निआज़ बोलते थे। हालांकि हमें उन से कोई खाने की चीज़ लेने...


  • मेरी कहानी – 6

    मेरी कहानी – 6

    लूट मार के बाद गाँव में कुछ दिन शांत रहे, लेकिन अब और अजीब बातें  सुनने को मिलने लगीं। लोग बातें कर रहे थे कि पाकिस्तान से एक गाड़ी आई थी  जो हिन्दू और सिखों की लाशों से...




  • मेरी कहानी – 4

    मेरे बचपन के दोस्तों की लिस्ट तो बहुत बड़ी है लेकिन फिलहाल मदन लाल जिस को  मद्दी बोलते थे और तरसेम का ज़िकर ही  करूँगा। मद्दी का घर हमारे घर के बिलकुल सामने था। मद्दी के पिता जी मलावा...

  • मेरी कहानी – 3

    देहरादून की पहली याद तो लिख चुका  हूँ लेकिन अपने गाँव राणी पुर का छोटा सा इतिहास भी लिखना चाहूंगा। जितने भी गाँव शहर या देश होते हैं उन को नाम देने का कोई कारण होता है  जो...

  • “बचपन “

    “बचपन “

    “बचपन” को याद कर के अपना वर्तमान नही बिगाड़ना चाहती । बहुत ही मुश्किल भरा बचपन था मेरा। सात बच्चों को पालना पिताजी के लिए बड़ी मुसीबत भरा काम था। उस पर आय सीमित। पिताजी बेकरी...

  • मेरी कहानी – 2

    मेरी माँ अक्सर बहुत  बातें किया करती थी। वोह स्कूल तो गई नहीं थी लेकिन थोड़ी सी पंजाबी लिखना पढना जानती थी और मज़े की बात यह कि वोह कुछ कुछ हारमोनियम भी बजाना जानती थी....