Category : बाल कहानी

  • बुद्धिमान चित्रकार

    बुद्धिमान चित्रकार

    एक बार की बात है किसी राज्य में एक राजा था जिसका केवल एक पैर और एक आँख थी। उस राज्य में सभी लोग खुशहाल थे  क्यूंकि राजा बहुत बुद्धिमान और प्रतापी था। एक बार राजा के विचार आया कि क्यों...

  • पानी का सदुपयोग

    पानी का सदुपयोग

    मम्मी पापा की डांट का भी कैलाश पर असर नहीं होता था, नल खुला छोड़ देता, खूब पानी बर्बाद करता। एक बार उनके घर मीनाक्षी आंटी आई कैलाश की मम्मी ने पानी का पूरा भरा गिलास...

  • बाल  कहानी : नव  वर्ष

    बाल कहानी : नव वर्ष

    आज रीना बहुत उदास थी । उसकी सभी सहेलियाँ न्यू ईयर पार्टी के लिए बाज़ार से नये कपड़े, जूते , हेयरबैंड , चूड़ियाँ आदि खरीद कर लाए थे । सब एक दूसरे को बता रहे थे...

  • आस्था की जीत

    आस्था की जीत

    मिली अपने मम्मी-पापा की इकलौती कन्या थी. भोली सी शकल, दुबली-पतली, पर चुलबुली मिली सबकी प्यारी थी. उस की दादी भी उसी के साथ रहती थी. दादी से वह झगड़ती, रूठती, कट्टा करती, खेलती एवम् कहानियां...

  • गंगा स्नान

    गंगा स्नान

    दस वर्ष की मनु के पैर आज ख़ुशी के मारे ज़मीन पर ही  नहीं पड़ रहे थे I जैसे ही उसके पापा ने उसे बताया कि गाँव से उसकी दादी आने वाली है उसका गोलमटोल मुहँ...

  • मित्रता में स्वार्थ कहाँ ?

    मित्रता में स्वार्थ कहाँ ?

    रिंकी सात वर्ष की बहुत ही प्यारी बच्ची थी।लकिन थी बहुत चंचल व शैतान। स्वाभाव से थोड़ी स्वार्थी भी थी। हर रविवार को अपने पिताजी के साथ बाज़ार जाती और कोई न कोई नया खिलौना खरीद...

  • बाल कहानी- विद्या का दान

    बाल कहानी- विद्या का दान

    बहुत समय पहले की बात है। दो सहेलियां थीं। एक का नाम रमा था और दूसरी का निशा था। दोनों घनिष्ठ मित्र थीं। अपना सुख-दुःख, परेशानियाँ, अच्छाइयाँ सब एक दूसरे को बतातीं। एक दूसरे के सुख...

  • कहानी – मुझको भी आज़ादी चाहिए

    कहानी – मुझको भी आज़ादी चाहिए

    “देखो -देखो….दादी!  इसके कोमल-कोमल पंख,छोटी-सी चोंच।देखो ना दादी,, क्या आप नाराज़ हैं मुझसे? ” समीर ने अपनी दादी से कहा ।”हां नाराज़ हूं….कितनी बार तुझे मना किया है कि पक्षियों को इस तरह मत पकड़ा कर।इन्हें...


  • नन्हा सैनिक

    नन्हा सैनिक

    चारों ओर से धमाकों की आवाज़ आ रही थी I ऐसा लग रहा था मानो दीपावली हो, पर यह पटाखों की नहीं बल्कि हथगोलों और बंदूकों की आवाज़े थी I सन्नाटे को चीरती जब किसी जवान...