नवीनतम लेख/रचना


  • बालगीत : ऐसा कोई जादू हो

    बालगीत : ऐसा कोई जादू हो

    जैसे मुझसे दूर हटे माँ होते मेरे आँसू जारी छोटे-छोटे हाथ-पाँव हैं ठीक तरह न चल सकता हूँ जो घुटनों के बल दौडूँ तो मत पूछो, कितना थकता हूँ। माँ की गोदी में जाते ही पूरी...

  • वो लम्हा ……।

    वो लम्हा ……।

    वो पल वह मंजर लूटता सा , विस्फारित नयन वो लम्हा दिल दहलता विह्वल रूदन चीत्कार मचा हाहाकार छितरे मानव अंग बिखरा खून सूखे नयन उस क्षण फैलती आँखे रूक गयी साँसे भयावह विस्फोट गोलियों की...

  • उनकी बेरुखी

    उनकी बेरुखी

      उनकी बेरुखी का आलम, कुछ इस तरह था जालिम, आंसू हमारे देख कर भी, वोह मुस्करा रहे थे, पूछा जो हमने उनसे – क्या थी खता हमारी’ वोह हंस के बोले हम तो, यूं ही...


  • बाल कहानी – ओढ़ ली रजाई

    बाल कहानी – ओढ़ ली रजाई

    वसंत आया। चींटी के बच्चों ने कहा-‘‘मम्मी! हम कब तक अंधेरे में रहेंगे? हमें दुनिया देखनी है।’’ चींटी ने डाॅटते हुए कहा-‘‘चुप रहो। अभी तुम बच्चे हो। जब बड़े हो जाओगे, तब जाना।’’ एक बच्चे ने...


  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी २)

    नम्र निवेदन इतिहास का एक कुशल विद्यार्थी वही है जो इतिहास का सिर्फ अध्ययन न करे अपितु उसका अंवेषण करें। वह उन तथ्यों का गहराई से विवेचन करे जिसे तत्कालीन और समकालीन इतिहासकारों ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर...

  • साथ तुम्हारा

    साथ तुम्हारा

    गुजरा कल उदासी भरा था तय कर रही थी सुनी रहें बिना किसी अनुभूतियों के—- तुम कब शामिल हो गए मेरे वजूद में खामोशी से मुझे पता ही नही चला रज-कण पर फैल जाती है जैसे...

  • चार बाल कवितायेँ

    चार बाल कवितायेँ

    1-उमड़-घुमड़ कर आते बादल   उमड़-घुमड़ कर आते बादल मुझे बहुत भाते हैं बादल। कभी बजाते ढोल मंजीरे कभी चमक दिखलाते बादल। खेतों को नहलाते  देते जब पानी भर लाते बादल। और कभी तो घुड़की देकर...

राजनीति

कविता