नवीनतम लेख/रचना

  • इंतज़ार बाक़ी है

    इंतज़ार बाक़ी है

    इंतज़ार… इंतज़ार इंतज़ार बाक़ी है. तुझे मिलने की ललक और खुमार बाक़ी है. यूँ तो बीती हैं सदियाँ तेरी झलक पाए हुए. जो होने को था वो ही करार बाक़ी है.   खाने को दौड़ रहा...



  • नवरात्रा

    नवरात्रा

    नवरात्रा पर्व मनाते है देवी को हम रिझाते है खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखा हवन पूजन कराते है पर क्या कभी किसी देवी की मनोस्थिति समझनी चाही कोख मे ही मारा किसी ने जब भी वो जन्म...

  • सब गड़बड़ झाला है

    सब गड़बड़ झाला है

    24 सितम्बर के हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी द्वारा लिखा लेख प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जातिवाद के विषय में मान्यता का विश्लेषण एवं मनुस्मृति पर जातिवाद का पोषण करने...

  • आलेख

    आलेख

    आलेख जीवन के अंतिम प्रहर में अपने घर में अलग थलग पड़ जाते है घर के बुजुर्ग कुसूर स्वयं उनका या घर के छोटो का ? आज देश में पाश्चात्य संकृति ने हर घर में प्रवेश...


  • ~कृपा बरसा जाना~

    ~कृपा बरसा जाना~

      धर्म विरुद्ध कभी ना चले हम मैया तू सदा मार्गदर्शन करती रहना मैया हम तो तेरी ही संतान हैं हम पर सदा अपनी नजर बनाये रखना माना मानुष तन में रह खुद पर कभी गर्व...

  • कविता : सीली यादें

    कविता : सीली यादें

    आहा ! प्यार भरी वो बारिश……. सदा याद रहेगी मुझको जी भरकर भींगे थे हम हर लम्हा हर पल जीया था हमने इन्द्रधनुषी सपने जैसा , पर बरसात के मौसम की तरह तुम भी अब गुम हो गए...

  • गिरवी

    गिरवी

    कॉलेज ख़त्म होने का आखिरी दिन, सभी लोग एक दूसरे से विदा ले रहे हैं. गले मिल रहे हैं. अपना फ़ोन नंबर बदल रहे हैं. एक दूसरे को भविष्य में न भूल जाने का प्रण ले...

कविता