स्वास्थ्य

भोजन करने के नियम

भोजन करने से पहले और बाद में याद रखने योग्य आवश्यक नियम जब हम भोजन करते हैं तो हमें भोजन से पूर्व और भोजन के बाद बहुत-सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे हम अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं। भोजन करने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नानुसार हैं- * प्रातः बिना स्नान किए […]

कविता

तिरस्कार

मैं जानती हूँ जो  खूबसूरती ढूंढती हैं  तुम सब की नज़रें  वो नहीं मिलती मुझमे….. पर क्या इस से तुम्हे  मेरी अवहेलना करने का हक़ मिल जाता है ? या तो खुले आम कह दो या मुझे आज़ाद कर दो ऐसे रिश्तों से …….  नहीं सह सकती मैं और तिरस्कार उस बात के लिए जिसमे मेरा कोई […]

कविता

“गीतिका”

सावन का श्याम झूला, डारी कदमा डारी इक बार फिर झूला दों, श्यामल रास बिहारी सखियां विवस खड़ी हैं, चितवत राह तुम्हारी देखों भी श्याम आओं, आओं तनिक मझारी || मुरली की तान कान्हा, तरसत महल अटारी सुध बुध बिसर रही है, तक गोवर्धन गिरधारी || महा माया मन-मन राचे, बोझिल जीवन धारी पग पग […]

सामाजिक

तीज पर्व

सावन का हरित महीना जब प्रकृति ने धानी चुन री ओढ़ी होती है। तभी अपने देश के विभिन्न क्षेत्रो में तीज पर्व का महोत्सव मनाया जाता है शायद। प्रकृति के संग रंगने को हमारा भी तन-मन उमंगित हो जाता है और प्रकृति पर्याय अर्थात् स्त्री जी हाँ, वह भी लगभग पूरे सावन भर हरे-भरे रंग के वस्त्रों को ही पहनना […]

सामाजिक

जैन समाज का पर्युषण पर्व

आज जैन समाज के पर्युषण पर्व की समाप्ति पर “क्षमा-वाणी” (मिच्छामि – दुक्कड़म्) का पर्व मनाया जाता है। स्वयं को क्षमा करना सबसे बड़ी व पहली क्षमा है। माफी से माफ करने वाला भी हलका होता है। उसे लगता है जैसे क्षमा करने से उसके सिर से बोझ उतर गया है। क्षमा करने में दूसरा व्यक्ति इतना महत्वपूर्ण नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं तुम तो ख़ुद ही क़ातिल हो, तुम ये बात क्या जानो, क्यों हुआ मैं दीवाना बेड़ियाँ समझती हैं बाम से उतरती है वो अप्सरा बन के जभी जिस्म की नज़ाक़त को सीढ़ियाँ समझती हैं यूँ तो सैर-ए-गुलशन को कितने लोग […]

कविता

स्त्री

हमने तो जिसे भी चाहा वहाँ सिर्फ़ धोखा ही मिला . जिसके लिये हमने अपनी हर खुशी हर चाहत तक कुर्बान कर दी पर बदले में सिर्फ़ धोखा ही मिला . वो हमे समझ ही नहीं पाया हम उसकी खुशी खोजते रहे वो हमारी खुशी छीनता रहा हम उसे पूजते रहे वो हमे प्रताड़ित करता […]

बाल कविता

बालगीत – दोस्त हमारे कितने सारे

आसमान में सूरज-चंदा और सितारे हैं देखो-देखो दोस्त हमारे कितने सारे हैं एक बार भी कभी किसी ने हमें नहीं है टाला जो जितना दे सकता, उसने उतना दिया उजाला जग को रौशन करते हैं ये कितने प्यारे हैं आसमान में सूरज-चंदा और सितारे हैं हम तो इन्हें भुला दें पर ये हमको नहीं भुलाते […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सत्संग स्वर्ग और कुसंग नरक

ओ३म् किसी भी विषय के प्रायः दो पहलु होते हैं, एक सत्य व दूसरा असत्य। सत्य व असत्य का प्रयोग ईश्वर व जीवात्मा से लेकर सृष्टि के सभी पदार्थों व व्यवहारों आदि में सर्वत्र किया जाता है। ईश्वर  निराकार है, यह सत्य है और निराकार नहीं है अथवा साकार है, यह असत्य है। निराकार अर्थात् आकार […]

कविता

कोई भूख से मरता है…

कोई भूख से मरता है मैं सपनों की बात कैसे करुं। वहां मौत का मातम है मैं यहां रंगरास कैसे करुं। होते होगें पत्थर के दिल उनके जो मुस्कुरा लेते हैं औरों के रोने पर मैं तो बस साधारण इंसान हूं काबू मानवीय जज्बात कैसे करुं॥ लोग तो सैंकते हैं लाशों पर भी रोटियां लोग […]