नवीनतम लेख/रचना


  • तन और मन

    तन और मन

    भगवान ने तन दिया , भगवान ने मन दिया तन अच्छा तो मन अच्छा मन अच्छा तो तन अच्छा , दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं, मन को अच्छा रखो’ अच्छे विचारों से, मन को...

  • जब तुम मिली

    जब तुम मिली

    जब तुम मिली मुझे ऐसा लगा। जमाने की सारी खुशी मिल गई। जब तुम मिली,तब मैं ऐसा समझा। जिन्दगी में खुशियों की बहार आ गई। जब तुम मिली मुझे महसूस हुआ। तरसते लबों को हँसीं मिल...

  • यशोदानन्दन -४१

    अक्रूर जी ने कंस का कथन बड़े ध्यान से सुना। कुछ समय मौन रहकर विचार किया – यदि वह बालक देवकी की आठवीं सन्तान है, तो अवश्य ही इस दुराचारी का वध करने में समर्थ होगा।...

  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 60)

    55. मंगल उत्सव राजमहल की अट्टालिका पर साम्राज्ञी देवलदेवी खड़ी थी। सांझ ढल रही थी। स्वच्छ आकाश में तैरते हुए पक्षी अपने रैन बसेरे की ओर जा रहे थे। राजमहल के मंदिरों से शंख, घंटे और आरती की...



  • बुढ़ापा

    बुढ़ापा

    पिता जैसा बनना ….. हर लडकी का सपना ….. लक्ष्य निर्धारित किया अपना …. संयुक्त परिवार विलीन नहीं हो सकते हैं रफू का गुण सीखो रिश्ते रफ़ू से ही चलते हैं .. . बुढापे पर बात...



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