राजनीति

जनसुविधा व बदलाव लाने वाला रेल बजट

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2016-17 रेल बजट पेश कर दिया है। वार्षिक उत्सव के रूप में हर बार की तरह इस बार भी सभी विपक्षी दलों ने रेल बजट की आलोचना करते हुए निराशा व्यक्त की हैं लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रेल बजट की सराहना करते हुए तथा […]

लघुकथा

लघुकथा : नई सड़क

उस नई कॉलोनी में सीमेंटेड  सड़क बन गई  थी। बहुत दिनों बाद मांग पूरी होने से लोग बेहद खुश थे। बच्चों और युवाओं को हिदायत दी गई थी कि जब तक सड़क सूख न जाए, तब तक वे उस पर साइकिल , बाइक , कार वगैरह न चलाएं। लेकिन शाम को कई बाहरी बाइकर्स बेहतरीन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मासूम से ये बच्चे, खेले हैं गोलियों से समझे न भूखा बचपन, सपने हैं रोटियों से पर्वत की पीर पूछो, उस बावली घटा से कुहरे में जा छिपा है, डरता है बिजलियों से सरहद पे बेटा बैठा, आँखों में माँ की आँसू अखबारों से डरे वो, डरती है आहटों से दिल तो पड़ा है घायल, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

निगाहों से क्या क्या किये जा रहे हो क़यामत हैं आंखें ग़ज़ब ढा रहे हो अगर मान जाओ तो पूरे मैं कर दूँ ये रेशम से सपने बुने जा रहे हो मोहब्बत का जादू गज़ब ढा रहा है दिवाने से तुम तो नज़र आ रहे हो ज़रा रुख से अपने तो परदा हटाओ के खुद […]

गीत/नवगीत

गीत

कोई अमीर है, कोई गरीब है बस अपना अपना नसीब है मुलाकात अपनी ना हो सकी तू भी फासलों पे कुछ रहे मैं भी देखूँ दूर दूर से यहाँ कौन किसके करीब है बस अपना अपना नसीब है मैं ना कह सका मेरे दिल की बात कई खत लिखे हुए रह गए कासिद कोई मिला […]

राजनीति

हिंसक होते आरक्षण आंदोलन- राजनैतिक साजिशों के कारण ?

हरियाणा में आश्चर्यजनक ढंग से जाट आरक्षण आंदोलन हिंसक हो गया। 30 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति का नुकसान, कम से कम दो दर्जन मौतों और कई लोगों के घायल होने के बाद तथा सेना द्वारा मोर्चा संभालने और केंद्र व राज्य सरकार की ओर से जाटों को ओबीसी कोटे से छेड़छाड़ किये बिना […]

कविता

वक्त

वक्त ने कब ज़िन्दगी का साथ दिया है , हमेशा आगे ही चलता जाता है ! ज़िन्दगी वक्त की परछाई सी नजर आती है ! वक्त बहुत बेरहम है अपनी परछाई का भी साथ छोड़ जाता है ! वक्त का हर सितम ज़िन्दगी सहती जाती है मगर उफ़ नहीं करती ! किसी के पास इतना […]

गीत/नवगीत

गीत : वह गोद मेरी लेटकर

वह गोद मेरी लेट कर, ताके सकल सृष्टि गया; मेरी कला-कृति तक गया, झाँके प्रकृति की कृति गया ! देखा कभी मुझको किया, लख दूसरों को भी वह गया; मन की कभी कुछ कह गया, वह सुने सब उर सुर गया ! प्राय: पलट सहसा उलट, वह अनेकों लीला किया; मन माधुरी से भर दिया, […]

गीत/नवगीत

गीत : वह समझता मुझको रहा

वह समझता मुझको रहा, मैं झाँकता उसको रहा; वह नहीं कुछ है कह रहा, मैं बोलता उससे रहा ! अद्भुत छवि आलोक रवि, अन्दर समेटे वह हुआ; नयनों से लख वह सब रहा, स्मित वदन बस कह रहा ! हाथों पुलक पद प्रसारण, भौंहों से करता निवारण; भृकुटी पलट ग्रीवा उलट, वह द्रश्य हर जाता […]

लघुकथा

लघुकथा : माँ

मैंने रेड सिग्नल पर अपनी स्कूटर रोकी . ये सिग्नल सरकारी हॉस्पिटल के पास था . उस जगह हमेशा बहुत भीड़ रहती थी. मरीज , बीमार, उनके रिश्तेदार और भी हर किस्म के लोगों की भीड़ हमेशा वहां रहती थी. अब चूँकि सरकारी हॉस्पिटल था तो गरीब लोग ही वहां ज्यादा दिखाई देते थे. अमीर […]