क्षणिका

क्षणिकायें…

१-प्यार की कहानी

रूबरू मिलना होता नहीं ज़रूरी
बिना मिले ही
प्यार की कहानी हो जाती है पूरी

२-व्यथा

पढ़ते रहे एक दूसरी की कथा
पर
एक जैसी होती है सबकी व्यथा

३-अश्क़

तेरी आँखों से भी मेरे लिए कभी कभी आंसूं बहते होंगे
यह सोचकर मेरे अश्क भी तेरे दर्द को और सहते होंगें

४-याद

तेरी यादों के सहारे ये जिंदगी गुजर जायेगी
तेरी तस्वीर जब तब आँखों में उभर आयेगी

५-दीदार

उनकी दृष्टि से हम
गुनाह कर बैठे
बिना पूछे उनसे हम
चुपके से
उनकी तस्वीर का
दीदार कर बैठे

6-फासला

बहुत फासला तय करना पड़ा मुझे
जीत कर तेरा दिल
रस्मों रिवाज के हाथो
तुझे ……
हारना पड़ा मुझे

किशोर कुमार खोरेन्द्र

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

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