कुण्डली/छंद

पञ्च-चामर छन्द

पञ्च-चामर छन्द में लघु -दीर्घ [१२ x ८ =24] होते हैं, सोलह १६ वर्ण यति ८, ८ होता है

मापनी=12 12 12 12= 12 12 12 12

नमामि ज्ञान दायनी प्रभा प्रकाश वाहिनी
सरस्वती करो कृपा सदा विभूति वाहिनी
अखंड ज्योतिका जले निशा हिया मिटे सदा
अज्ञान ज्ञान से भरे सुधा जमी बहे सदा
रसाल शब्द व्यंजना समास छ्न्द भावना
अमोघ शब्द शारदा , निहाल चन्द साधना
अगाध प्रेम कालिका बिलोकि लोक पालिका
बिहार गीत गीतिका समंत्र तंत्र नीतिका
नमामि मातु शारदा नमामि मातु शारदा
करो दया भरो सुधा विशेष ज्ञान शारदा

— राजकिशोर मिश्र ‘राज’

राज किशोर मिश्र 'राज'

संक्षिप्त परिचय मै राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी कवि , लेखक , साहित्यकार हूँ । लेखन मेरा शौक - शब्द -शब्द की मणिका पिरो का बनाता हूँ छंद, यति गति अलंकारित भावों से उदभित रसना का माधुर्य भाव ही मेरा परिचय है १९९६ में राजनीति शास्त्र से परास्नातक डा . राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से राजनैतिक विचारको के विचारों गहन अध्ययन व्याकरण और छ्न्द विधाओं को समझने /जानने का दौर रहा । प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश मेरी शिक्षा स्थली रही ,अपने अंतर्मन भावों को सहज छ्न्द मणिका में पिरों कर साकार रूप प्रदान करते हुए कवि धर्म का निर्वहन करता हूँ । संदेशपद सामयिक परिदृश्य मेरी लेखनी के ओज एवम् प्रेरणा स्रोत हैं । वार्णिक , मात्रिक, छ्न्दमुक्त रचनाओं के साथ -साथ गद्य विधा में उपन्यास , एकांकी , कहानी सतत लिखता रहता हूँ । प्रकाशित साझा संकलन - युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच का उत्कर्ष संग्रह २०१५ , अब तो २०१६, रजनीगंधा , विहग प्रीति के , आदि यत्र तत्र पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं सम्मान --- युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच से साहित्य गौरव सम्मान , सशक्त लेखनी सम्मान , साहित्य सरोज सारस्वत सम्मान आदि

6 thoughts on “पञ्च-चामर छन्द

  • लीला तिवानी

    प्रिय राजकिशोर भाई जी, अति सुंदर छंद के लिए आभार.

    • राज किशोर मिश्र 'राज'

      बहन जी स्नेह के लिए आभार एवम् प्रणाम

    • राज किशोर मिश्र 'राज'

      प्रिय मित्र रमेश सिंह जी सादर आभार

  • विजय कुमार सिंघल

    उत्तम छंद !

    • राज किशोर मिश्र 'राज'

      आदरणीय जी हौसला अफजाई के लिए आभार

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