धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

एक ईश्वर अनेक नामों से जाने जाते हैं

मोहन नाम का एक व्यक्ति दूरबीन लेकर लोगों को तमाशा दिखाया करता था। एक दिन मोहन ने देखा कि एक स्थान पर दो व्यक्ति आपस में लड़ रहे थे। उसने उन्हें रोका और उनकी समस्या बताने को कहा। दोनों की समस्या भगवान को लेकर थी। एक ने कहा भगवान मंदिर में है, दूसरा बोला भगवान मस्जिद में है।
मोहन ने पहले व्यक्ति की आंखों के सामने दूरबीन रखी और पूछा-‘कुछ दिख रहा है?’ जवाब मिला- हां यह संसार दिख रहा है। हर पल जिस प्रकार से अनेकों मनुष्य-पशु आदि का जन्म हो रहा हैं तो उसी प्रकार से अनेकों मनुष्य-पशु आदि की मृत्यु भी हो रही हैं। यह सम्पूर्ण जीवन-मरण का चक्र ईश्वर द्वारा चलायमान हैं। सभी प्राणियों की आकृतियां, रंग, रूप आदि भिन्न भिन्न हैं।’ अब मोहन ने दूसरे से दूरबीन से ओर देखने को कहा। वह देखने लगा तो दूरबीन वाले ने उससे पूछा-‘कुछ नजर आ रहा है?’ दूसरे व्यक्ति ने कहा-‘अरे वाह। मुझे तो पृथ्वी के सभी मंदिर, मस्जिद, चर्च, पगोडा और गुरुद्वारे दिखाई दे रहे हैं। उनमें कई इंसान बैठे हैं। वहां तरह-तरह के मनुष्य हैं और सब अपने जैसे तरह-तरह के भगवान बना रहे हैं।’
अब मोहन ने पूछा यह बताओ की भगवान मनुष्यों को बनाते हैं अथवा मनुष्य भगवान को बनाता हैं।
दोनों ने उत्तर दिया – मनुष्य को बनाने की शक्ति तो केवल और केवल भगवान में हैं। मनुष्य में यह सामर्थ्य कहा?
मोहन ने उत्तर दिया” ‘बस यही झगड़े की जड़ है। इस पृथ्वी पर इंसान अपने-अपने भगवान बना लेता है। लेकिन वह यह नहीं समझ पाता कि उसे बनाने वाला वह परमात्मा एक ही है।’ मोहन की यह सरल व बोधगम्य व्याख्या दोनों सुनने वालों के हृदय में उतर गई और उन्होंने आपस में भगवान को लेकर लड़ना बंद कर दिया। दोनों को यह विश्वास हो गया की भगवान के असंख्य गुण होने के कारण असंख्य नाम होना तो संभव हैं मगर भगवान तो केवल और
केवल एक ही है।
ऋग्वेद 1/164/46 में एक ईश्वर होने का महान सन्देश “एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” अर्थात विद्वान /ज्ञानी लोग एक ही सत्यस्वरूप परमेश्वर को विविध गुणों को प्रकट करने के कारण इन्द्र, मित्र,वरुण आदि अनेक नामों से पुकारते हैं। परम ऐश्वर्य संपन्न होने से परमेश्वर को इन्द्र, सबका स्नेही होने से मित्र, सर्वश्रेष्ठ और अज्ञान व अन्धकार निवारक होने से वरुण, ज्ञान स्वरुप और सबका अग्रणी नेता होने से अग्नि, सबका नियामक होने से यम, आकाश,जीवादी में अन्तर्यामिन रूप में व्यापक होने से मातरिश्वा आदि नामों से उस एक की ही स्तुति करते हैं।
डॉ विवेक आर्य

3 thoughts on “एक ईश्वर अनेक नामों से जाने जाते हैं

  • लीला तिवानी

    प्रिय विवेक भाई जी, अति विवेकमय, सुंदर व सार्थक रचना के लिए आभार.

  • Man Mohan Kumar Arya

    सुंदर प्रेरणादायक रचना। बधाई स्वीकार करें। सादर।

  • Man Mohan Kumar Arya

    सुंदर प्रेरणादायक रचना। बधाई स्वीकार करें। सादर।

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