कविता

ढूंढे से तो मिला है तू

ढूंढे से तो मिला है तू
बर्षों किया है जब इंतजार
तब पद्म बनकर खिला है तू ।
बढ़ आगे तू हिंद के शेर
पीछे खड़ा है देश तुम्हारे
ना कर अब तू जरा भी देर ।
देश को है समृद्ध बनाना
हर चेहरे पे है मुसकान सजाना
भारत को विश्वगुरू का आसन है दिलाना ।
निरंतर बढ़ते पग तेरे
आश की किरन जगाते हैं
दिखाते हैं हमें नये सवेरे ।
सुन रूकना ना तू झुकना ना
साथ खड़े हैं सभी तेरे
अब तो डोल रहें हैं शत्रु के डेरे ।
हरओर हलचल मची हुई है
गद्दारों के नैनों से आज नींद भी उड़ी हुई है
जानें कौन सा गुनाह छुपाया था उन्होने
जो उनकी धड़कनें आज यूं बढ़ी हुई हैं ।
जनता आज हर्षित है
तुम्हारे कदम से कदम मिलाकर
देख तेरी जनता गर्वित है ।
डरना ना तू कभी एक पल को
तेरे संग चाहने को रैला है
कौन कहता है मोदी अकेला है ।
तुझसे तो इतना प्यार है सबको
हर दिल में तू बसता है
तेरे लिए हमारे मन से प्यार बरसता है ।

मुकेश सिंह
सिलापथार,असम
09706838045

मुकेश सिंह

परिचय: अपनी पसंद को लेखनी बनाने वाले मुकेश सिंह असम के सिलापथार में बसे हुए हैंl आपका जन्म १९८८ में हुआ हैl शिक्षा स्नातक(राजनीति विज्ञान) है और अब तक विभिन्न राष्ट्रीय-प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में अस्सी से अधिक कविताएं व अनेक लेख प्रकाशित हुए हैंl तीन ई-बुक्स भी प्रकाशित हुई हैं। आप अलग-अलग मुद्दों पर कलम चलाते रहते हैंl