गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मिल जाए तो अपना है
बाकी सचमुच सपना है
असली सोच जमाने की
संघर्षों   में   खपना   है
जीवन का तो मकसद ही
मानवता  को  जपना  है
कुन्दन  रूप  बनाने  को
भट्ठी  में  ही  तपना  है
‘नवीन’ कवि का काम नहीं
जैसे  –  तैसे    छपना    है
नवीन हलदूणवी 

नवीन हलदूणवी

नवीन हलदूणवी काव्य-कुंज जसूर-176201, जिला कांगड़ा,. हिमाचल मो 09418846773