गीत/नवगीत

तू महान जय जवान

ज़िन्दगी की राह में हों असंख्य अड़चने |
दुःख के पहाड़ हों या की दर्द हों घने |
तू नहीं निराश हो मन में बस विश्वास हो
कर शपथ हर डगर पग बढ़ा तने – तने |

ना थके ना रुके ना मुड़े विपत्ति में |
एक पत्र छाँह भी माँग ना विपत्ति में |
पत्थरों को काट कर रास्ता बनाएजा-
सामने ही लक्ष्य है जीत हर विपत्ति में |

धीर – वीर बन के तू दुश्मनों पे वार कर |
दहशतें जड़ से मिटा आतंकियों को मार कर |
पांच्यजन्य फिर बजा गूँज जाये विजय पथ –
प्रज्ज्वलित हो ज्ञान ज्योति शक्ति का विस्तार कर |

जुगनुओं की पंक्ति सा चीर अंधकार को |
आंधियों के वेग सा रोक हर प्रहार को |
लक्ष्य को तू साध ले हर डगर हो विजय पथ –
तू महान जय जवान तेज कर कटार को |
©मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’
लखनऊ ,उत्तर प्रदेश

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016