कविता

होली की मस्ती में

होरी के हुड़दंग में सबकुछ जाती हूँ भूल ,
सुबह शाम बस याद रहता है
अबीर गुलाल और टेसू फूल ,
सखियन संग धूम मचाती
जब टोली संग जाती हूँ ।
उड़े गुलाल और पड़े फुहार
मै गीत खुशी के गाती हूँ ॥
होरी के ————
नाचूं गाऊँ और खुशी मनाऊँ ,
जब में मस्ती पर आती हूँ ।
लाज शरम सब छोड़ -छाड़ के
हुड़दंग में शामिल हो जाती हूँ ॥
होरी के ————–
रंग पर रंग चढ़े कितने भी
परवाह मै नही करती हूँ ।
नशा चढ़े  मुझ पर कितना भी ,
मै बिल्कुल भी नही डरती हूँ ॥
होरी के ——————
गलियारों में धूम मचाती
जब हो जाती मै थककर चूर ।
तब तान चद्दरा में सो जाती
फाग का आनंद लेती भरपूर ॥
होरी के ——————-

—  डॉ . माधवी कुलश्रेष्ठ

डॉ. माधवी कुलश्रेष्ठ

पिता का नाम स्व . श्री हरेंद्र पाल कुलश्रेष्ठ पति का नाम श्री अरविन्द कुलश्रेष्ठ वर्तमान पता सी -14 न्यू आगरा फोन न . 9412426559 8218644036 ;8193909436 शिक्षा . एम॰ ए एम .एड पी .एच डी . (हिन्दी ..मनोविज्ञान इतिहास और संगीत गायन ) व्यवसाय - प्रधानाचार्य काव्य कलश सम्मान , भाव-भूषण सम्मान , और भी कई शाखाओं में उच्च पदों पर रहकर समाज सेवा कर रही हूँ लेखन कार्य भी करती हूँ । साझा संकलन भी छप चुके हैो