गीतिका/ग़ज़ल

सोच का दायरा बडा रखिये….

सोच का दायरा बड़ा रखिये
आदमीयत से राब्ता रखिये

दिल में सबके लिये वफ़ा लब पर
हर किसी के लिये दुआ रखिये

जब किसी पर लगाईये तुहमत
सामने अपने आईना रखिये

चाहिये गर सुकून तो अपनी
ख्वाहिशें मुख़्तसर ज़रा रखिये

वक्त लेता है इम्तिहां सबका
दौरे मुश्किल में हौसला रखिये

मंज़िलों तक अगर पहुँचना है
ज़ारी चलने का सिलसिला रखिये

ख़ुद से मिलना भी रस्म हो बंसल
ख़ुद को ख़ुद से न यूँ ख़फ़ा रखिये

सतीश बंसल
१९.०३.२०२१

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.