कविता

हसरतें

हसरतें जिंदा रहेंगी
जब तक दुनिया कायम रहेगी,
यह अलग बात है कि
मुखौटों की कमी न होगी।
मन में जहर भरे
मुस्कुराते चेहरों के बीच
जबरन हँसते रहना होगा,
मुँह में राम,बगल में छूरी
जिनका सिद्धांत हो,
उनकी जय जयकार के बीच
मजबूरन जीना होगा।
हसरतों का भी हम
क्या करें साहब?
जब तक जिंदा हैं
हसरतों को भी
जिंदा रखना होगा।
हसरतों को मारने की
भूल भला कैसे करें?
हसरतों के मरने से पहले
खुद मरना होगा।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921