क्षणिका

गोरे-गोरे मुखड़े पे दिल क्यों काले ?

शादीशुदी महिलाएँ
अविवाहित पुरुषों को
देखना पसंद नहीं करती ?
कुँवारे पुरुष भी
विवाहित महिलाओं के
पति से
मेलजोल नहीं बढ़ाते !
××××
एक महिला सहकर्मी के
गतवर्षीय बोल-
‘उन्हें तो ब्रह्मा भी
नहीं समझ सकते हैं !’
स्त्रीमन की बात ?
××××
एक महिला
सहकर्मी ने कहा-
‘न वो खाती हैं,
न खिलाती हैं !’
किन्तु पिछले
5 साल तक वो
दूसरों की ‘मक्खी’ भी
चूस-चूसकर खायी !
××××
मटुकनाथ की याद
हो आयी !
आज भी मैं
उनके अप्रिय छात्रों में
एक हूँ !
××××
महिलाएँ अपने पति को
इसतरह बदल लेती हैं?
यथा- पहले खाकपति थे,
अब लखपति !
रोडपति से करोड़पति !
उपराष्ट्र.. से राष्ट्र.. !
××××
संतान अच्छा करे
तो ‘बाप’ पर गया है,
लोग ऐसा कहेंगे ?
और गलती करे,
तो ‘माँ’ जिम्मेवार ?
क्यों ?
××××
गोरे-गोरे
मुखड़े !
पर
दिल क्यों है
‘काले’ ?
××××

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.