लघुकथा

बदले रिश्ते

अचानक फोन की घंटी बजी सोनाक्षी ने लपककर फोन उठाया
“हैलो” उधर से आवाज आई
“भैया” सोनाक्षी ने चहककर कहा
“सोना तुम से कुछ बात करनी थी” अक्षय ने कहा
अक्षय सोनाक्षी को प्यार से सोना कहता था।
“हां कहिए भैया , आपने कितने दिनों के बाद फोन किया है। क्या मेरी याद आती नहीं? ” सोनाक्षी का आवाज थोड़ा भर्रा गया ।
अ‌क्षय ने उसे नजरंदाज करते हुए कहा “सोना अब हम बच्चे नहीं रहे ,अब हमलोग की अपनी -अपनी गृहस्थी है, अपनी -अपनी जिम्मेदारी है, छोड़ो इन बातों को मुझे तुमको कुछ कहना है “
“हां भैया कहिए ” सोनाक्षी ने उत्सुकता वश कहा।
“देखो सोना  तुम हमारे घर के मामले में दखल देना बंद करो, बात -बात पर अपनी भाभी को सलाह देना बंद करो ,वह क्या करती और क्या नहीं उससे तुम्हारा क्या लेना-देना ।”
” ‌  ” सोनाक्षी थोड़ी देर के लिए आवाक् रह गई , ऐसा क्या कह दिया मैंने भाभी को।
” ये तुम्हारी भाभी की मर्जी वो अपने मायके वालों पर ज्यादा ध्यान दें अपने मम्मी पापा को अपने पास रखें। तुम कौन होती हो उसे ये कहनेवाली अपने ससुराल वालों का ख्याल रखिएगा, पापा की देखभाल करना उसकी जिम्मेदारी । तुम अपनी सोच अपने पास रखो। आगे  से उससे  कुछ न कहना।” इतना कहकर अक्षय ने फोन रख दिया। सोनाक्षी को कुछ कहने का मौका भी नहीं दिया।
सोनाक्षी सोचने लगी यही वो भैया है जो उससे इतना प्यार करते थे उसकी हमेशा परवाह किया करते थे। आज कितना बदल गए है, उनकी नजर उसकी  कोई कीमत नहीं है। उसके जज्बातों की कोई परवाह नहीं है । ये सोचकर उसकी आंखें डबडबा गई।
— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P