गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुम्हारा दिल यूंही हमारा न होता।
हसीं आंख का जो इशारा न होता।

चले गुर्बत में भी हाथ थाम कर,
जहाँ में हर कोई यारा न होता।

मुकद्दर को क्यों कोसते फिर ऐसे;
कर्म जो करे वो बिचारा न होता।

बड़ा दूरियाँ तो चले जा रहे हो;
हमारा तन्हां क्यों गुज़ारा न होता।

हमारे दरमियाँ इक कशिश सी है;
मगर साथ क्यों यूँ गवारा न होता।

मनाते कभी जो समझा कर हमें;
कभी ख्वाब में ये नज़ारा न होता।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |