कुण्डली/छंद

नारी के चरणों में समर्पित शब्दांजलि

शशि से शीतलता मृदुलता फूलों से ले के
रब ने धरा को नारी तन से सजाया है
तेरी क्षमता ने धीर-वीर बलवीर नर
नर का शरीर शमशीर-सा बनाया है
ममता के आँचल में प्रीत का सहारा ले के
नारियों ने धरती पे स्वर्ग बसाया है
राम-रहमान हो या देवता-महान कोई
माँ के चरणों में शीश सबने नवाया है।

— शरद सुनेरी