सामाजिक

अप्रैल फूल बनाया

कहा जाता है कि जीवन जीने के लिए जीवन को जीवंत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि नीरस जीवन जीना किसी को पसंद नहीं होता है।जीवन में चुलबुलापन,हंसी मजाक और हास परिहास होना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। जीवन को पूरी तरह से अर्थात जी भर कर जीने के लिए उसमें हास्य का पुट होना ही चाहिए और यह बात सभी उम्र के लोगों पर लागू होती है ।कहा भी जाता है कि उम्र केवल एक संख्या मात्र होती है , अत: हर उम्र में जीवन को रंगों से सराबोर रखना और जीवन को हंस कर जीना न केवल हम सब का अधिकार है,अपितु हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से भी एक है।

 इस बात को तो वैज्ञानिक भी मानते हैं कि हंसकर, मुस्कुरा कर जीने से जीवन की बहुत सारी परेशानियों से बचा जा सकता है और अपनी उम्र को बढ़ाया जा सकता है। असमय होने वाली बीमारियों से बचने का सबसे अचूक और असरदार माध्यम भी हमारी हंसी और मुस्कुराहट ही तो होती है। हंसते मुस्कुराते व्यक्ति को चाहे वह,किसी भाषा विशेष अथवा प्रदेश विशेष का ही क्यों न हो,उसके चेहरे की हंसी और मुस्कुराहट ही उसके व्यक्तित्व की पहचान करवा देती है। उसको अपना परिचय देने की आवश्यकता नहीं होती। हंसी मजाक करना हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, इसलिए अपनी दिनचर्या में हम सभी को इसे अवश्य शामिल करना चाहिए। 

आज के इस आलेख का विषय मूर्ख दिवस अर्थात अप्रैल फूल डे है जो अधिकतर पश्चिमी देशों में मनाया जाता है किंतु पश्चिमी देशों की होड़ में वर्तमान समय में विश्व के अधिकतर देशों में इसे मनाया जाने लगा है।ब्रिटेन ,न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में इस दिवस को विशेष रूप से मनाया जाता है,इसके अतिरिक्त अन्य अनेक देशों में भी इस पूरे दिन हंसी मजाक और हास्य बना रहता है। हालांकि मूर्ख दिवस मनाने के लिए किसी भी देश में आधिकारिक तौर पर छुट्टी घोषित नहीं की जाती है। इस दिन लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों ,सगे संबंधियों और आसपास रहने वाले लोगों के साथ हंसी मजाक करते हैं, हास परिहास करते हैं और चुलबुली नटखट हरकतें करके जीवन को एक नया आयाम देने की कोशिश करते हैं ताकि वर्ष भर के तनाव को कुछ कम किया जा सके। कहने का तात्पर्य है कि इस दिन लोग जानबूझकर बेवकूफीपूर्ण हरकतें करते हैं। विशेष रूप से बच्चों को यह दिन मनाने में आनंद आता है और वे इस दिन अपने से छोटे-बड़े सभी को अप्रैल फूल बनाने की हर संभव कोशिश करते हैं और अप्रैल बनाने के बाद खुशी से झूम उठते हैं ।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस अप्रैल फूल को मनाकर हम सभी खुशी से झूम उठते हैं उस दिन को मनाने की शुरुआत कहां से हुई ,तो आइए,आज जानते हैं कि अप्रैल फूल डे मनाना कब से शुरू हुआ।

गूगल से प्राप्त जानकारी के आधार पर अप्रैल फूल डे की शुरुआत 1381 में हुई थी ।बताया जाता है कि उस समय के राजा रिचर्ड जीती और बोहेमिया की रानी ऐनी ने घोषणा करवाई कि वे दोनों 32 मार्च 1381 को सगाई करने वाले हैं और यह खबर सुनकर वहां की जनता को बहुत खुशी हुई और खुशी के मारे जनता झूम उठी ।लेकिन 31 मार्च 1381 के दिन उसी जनता को समझ आया कि मार्च माह में 32 तो आता ही नहीं है और फिर वे समझ गए कि उन्हें मूर्ख बनाया गया है। तभी से 32 मार्च अर्थात 31 मार्च के अगले दिन 1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे यानी मूर्ख दिवस मनाया जाने लगा।हालांकि अप्रैल फूल मनाए जाने के पीछे और भी कई कहानियां प्रचलित हैं। 

19वीं सदी से पहले अप्रैल फूल दे इतना अधिक प्रचलित नहीं था ,किंतु 19वीं शताब्दी के बाद अप्रैल फूल डे बहुत ही जोरों शोरों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा और आज कल तो भारत में भी 1 अप्रैल को अधिकतर लोग हंसी मजाक ,मस्ती और प्रैंक करते नजर आते हैं। इस दिन सभी लोग एक दूसरे को मूर्ख बनाने के नए-नए बहाने ढूंढते रहते हैं।अलग-अलग देशों में अप्रैल फूल डे को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है और लोग साल भर इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।इसका मतलब तो यही हुआ कि अप्रैल फूल डे भी बाकी त्योहारों की ही तरह है और अपना एक अलग महत्व रखता है जिसके इंतजार में सभी लोग रहते हैं।

 अप्रैल फूल दिवस पर तो अनेकों गाने भी बने हुए हैं जिसमें से एक प्रसिद्ध गाना …अप्रैल फूल बनाया उनको गुस्सा आया…जिसे बॉलीवुड का मशहूर गाना माना जाता है। कुछ देशों में तो इस दिन लोग अपना वेश बदलकर दूसरे लोगों को मूर्ख और बुद्धू बनाने की कोशिश करते हैं और जब वे इस कोशिश में कामयाब हो जाते हैं तो खुशी से चिल्ला उठाते हैं। कहने का मतलब यह है कि अप्रैल फूल दिवस मूर्ख दिवस बेशक है किंतु यह दिवस लोगों को आनंदित अवश्य करता है।किंतु जितनी सच्चाई इस बात में है उतनी ही सच्चाई इस बात में भी है कि हमारा हंसी मजाक,हास्य और चुलबुलापन भी एक दायरे में ही होना चाहिए क्योंकि दायरे और सीमाओं के बाहर किया गया मजाक किसी के लिए हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है। यदि इस दिन का पूरा मजा लेना है तो इस दिन को मस्ती भरे अंदाज में अवश्य मनाएं,किंतु इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि आपकी वजह से किसी दूसरे का नुकसान न हो और बात इतनी न बढ़ जाए कि किसी की जान पर बन आए क्योंकि ऐसा अक्सर देखा गया है कि मज़ाक में कही गई बातें कभी-कभी जानलेवा सिद्ध होती हैं तो इस बात का खास ध्यान रखा जाना चाहिए और इस प्रकार के मैसेज या कॉल्स किसी को नहीं करने चाहिएं जिसे पढ़कर और सुनकर व्यक्ति नाहक परेशान हो उठे और दिक्कतों का सामना करना पड़े। दूसरों को बेवकूफ बनाने का अंदाज बिल्कुल बच्चों की तरह होना चाहिए ,जैसे बच्चे कहते हैं ना कि ,,,उल्लू बनाया बड़ा मजा आया… इस प्रकार के छोटे-छोटे हंसी मजाक ही किए जाने चाहिएं और यदि प्रैंक भी की जाती है तो उस प्रैंक का स्तर इतना हो कि प्रैंक पूरी होने पर व्यक्ति खिलखिला कर हंसने पर मजबूर हो जाए, न कि ऐसा कि उसे प्रैंक की वजह से दिल का दौरा ही आ जाए।

— पिंकी सिंघल

पिंकी सिंघल

अध्यापिका शालीमार बाग दिल्ली