कविता

कजिन

ये कजिन भी बड़े अजीब होते हैं।
दिल के ये कितने करीब होते हैं।

बचपन की नादानियों संग जीते हैं
बड़े होकर भी ये कहाँ हैं बदलते हैं

एक दूसरे के राज जानकर सब
मुस्कुरा कर ब्लैकमेल करें हरदम।

दोस्ती पक्की बातें न होती खत्म
सब जब हों इकट्ठे तो करते हुड़दंग।

हमउम्र हों तो फिर क्या ही कहने
दिन रात भी कम है गपशप करने।

सच में रिश्ता कजिन का जिन्दगी है
बेमतलब हंसना लगे न कोई कमी है।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |