गज़ल
ऐ वक्त इजाजत दे मुझे, मैं भी थोड़ा जी लूं
घड़ी भर को थम जा, मैं सांस तो थोड़ा ले लूं!
जिंदगी के जद्दोजहद में थक गए कदम मेरे
ऐ वक्त इजाजत दे थोड़ा सुकून मैं भी लें लूं!
सभी के जज्बात संभालती रही मैं ताउम्र
अब थोड़ा जज्बात खुद के भी संभाल लूं !
ऐ हसरतें यूं न सता घड़ी घड़ी मुझको
तू तो रुकती नहीं है मैं ही थोड़ा रुक लूं !
थके कदम ,रुकी राहें ,धुंधली मंजिले
बहुत हो गई मुश्किलें,थोड़ी राहत की सांस तो ले लूं !
— विभा कुमारी
