ग़ज़ल
पहले प्यार हुआ करता था यकीन के बाद
आजकल होने लगा है ये छानबीन के बाद
जाते – जाते मुझे ये राज़ बताते जाओ
कौन अगला शिकार है इस मिस्कीन के बाद
हवस बशर में इस कदर भरी हुई है कि
ये आसमां पे हक जताएगा ज़मीन के बाद
चूस के खून मेरा रंग बदलने वाले
कहां छुपेगा बता मेरी आस्तीन के बाद
दुआ कुबूल हो ही जाएगी इस बार मेरी
सुम्मा आमीन भी उसने कहा आमीन के बाद
— भरत मल्होत्रा
