गीत/नवगीत

गीत – लोहड़ी पर विशेष

निर्धन बेटी पदवी पाए तो कहलाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

सुख स्मृति आनंद अवस्था शुभ संकल्प बने।
वास्तविक निर्मित पुरूषार्थ के बादल हों घने।
नवयुग में संतुलित इच्छाओं को दरसाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

बेटियों के लिए दुल्ला-भट्टी की ना हो ज़रूरत।
परम पिता की नेक कमाई में ना हो फिर गुरबत।
आंगन में ऋर्षियों-मुनियों की भांति समझाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

माघ महीने की संक्रांति मधुर सुहानी होती।
फसलों की खुशहाली ऊपर खूब जवानी होती।
माघ की प्रथम रात का मौसम परवान चढ़ाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

कुटुंब भीतर उर्द्धांगिनी एक धुरी है नारी।
जिसके कारण सुन्दर लगती है यह सृष्टि सारी।
मातृ भूमि में फिर आत्म विश्वास बनाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

नवयुग में विज्ञान सिखाए नवजीवन में जीना।
शुद्धता बुद्धता सुखद अदाएं परिश्रम बीच पसीना।
भव्य अलौकिक सुषमा भीतर गीत सुनाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

रेवड़ी, गचक, गन्ने का रस, साग सरसों का, माखन।
तंदूरी रोटी, मांह की दाल रस से खाए साजन।
परदेशों से रिश्तों को हर वर्ष बुलाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

खर्चीले आयोजन छोड़कर शुद्ध त्यौहार मनांए।
अमृत महोत्सव के साथ बालम अच्छे कर्म कमाएं।
भारत मां की प्रतिभा-प्रतिष्ठा सांझ बढ़ाए लोहड़ी।
उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी।

— बलविन्दर बालम

बलविन्दर ‘बालम’

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब) मो. 98156 25409