क्या वो जरुरी था
जो छूट गया
जो टूट गया,
क्या वो बेशकीमती था?
जिसके न होने पर भी
जिंदगी चल रही है हमारी,
जिसके रूठने के बावजूद भी सांसें रुकी नहीं हमारी ।
वो महत्वपूर्ण कैसे हो सकता है?
वो प्राथमिकता कैसे ले सकता है?
कोई जीवन का हिस्सा,
सबसे प्यारा किस्सा
तो बन सकता है।
तुम कहो,
वो ही सारा जीवन है।
ऐसा कैसे हो सकता है??
पूछो मन से,
शांति में, एकांत में
क्या मेरा ‘मैं’ होना जरूरी है?
या वो जो मुझसे, मुझमें था
क्या वो जरुरी था?
— अंकिता जैन अवनी
