होली अब हो ली
होली अब हो ली
अब ना करो ठिठोली।
चलो फिर लड़े झगड़े।
चले दनादन फिर बत गोली।
अमन चैन से तुम बैठो ।
तो घर सूना सूना लगता है।
क्रीम पाउडर पुता चेहरा।
भी जूना जूना लगता है।
आओ फिर छेड़े युद्ध राग।
हर चिता दुःख जायेगा भाग।
बेलन झाड़ू चले दुपहरी।
होली अब हो ली।
शाम समय में हम तुम्हारी बड़ बड़ सुन लेंगे।
और रात की लड़ाई का मुद्दा चुन लेंगे।
खाने में नमक है ज्यादा ऐसा तुम भी कह लेना।
रौद्र रस प्रिय तुम भी में थोड़ा बह लेना।
चारो पहर रहे ना कोई कसर।
ऐसे लड़ते भिड़ते बीते जीवन का सफर।
— प्रज्ञा पाण्डेय मनु
