कविता

होली

पापा हँसकर रंग लगाएँ,
नन्हे बच्चे खिलखिलाएँ।

लाल, पीला, नीला, हरा,
होली ने सबको जोड़ा ज़रा।

मम्मी, पापा साथ खड़े,
नन्हे बच्चे रंगों में पड़े।

नीला, पीला, हरा, गुलाबी,
होली लगती कितनी प्यारी।

मिलकर सब खुशियाँ मनाएँ,
प्यार के रंग सब पर छाएँ।

मिलकर गाएँ, नाचें सब,
रंगों से भर जाएँ अब।

होली आई खुशियाँ लाई,
प्यारी दुनिया रंगीन बनाई।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh