अन्त में सिर्फ अन्त ही होता है
ढलती धूप कहेपत्तों पर अंतिम स्पर्शसमय मुस्काए शाख से गिरकरपत्ता धरती से मिलेचक्र पूर्ण हुआ साँझ की निस्तब्धपगडंडी सुनसान हैकदम
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Read Moreरंगों के त्यौहार में , है गुलाल अनुरोधहोली से डरना मना, सुन नादान अबोध। होली हँस के खेलना, सिखलाता है
Read Moreआ धमके साले-बहनोई होली मेंबजट कर गया साफ़ रसोई होली में फागुन ने सबको मतवाला कर डालालगता नहीं पराया कोई
Read Moreरोटी गरम बाजरे वाली।सरसों की भुजिया से खा ली।। जाड़े के ये अनुपम भोजन।करते नया स्वाद संयोजन।।हरी मटर की बजती
Read Moreआहट विरल वसंत की, रँगे हुए निज चीर।तन -मन वन -वन झूमती, सर सरिता के तीर।। अमराई में गूँजते, कुहू-कुहू
Read Moreडॉट पैन तब न थी नोटबुककिटकंनों की पगडंडी। एक हाथ में तख्ती लटकीकंधे पर बस झोलानाम मात्र की तीन किताबेंचंचल
Read Moreविचारणीय प्रश्न यह है कि उल्लू सदैव टेढ़ा ही क्यों होता है,जिसे सीधा करने की आवश्यकता पड़ जाती है ?
Read Moreप्रकृति ने किया श्रृंगार आई फाल्गुनी बहार है,जीवन में खिले फिर इंद्रधनुषी रंग बेशुमार है । मुस्कुराने लगी है कलियॉं
Read Moreकेरल चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। शशि थरूर का मामला
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