यू टर्न
जब देखो आजकल लोग यू टर्न लेते हैं मार
अपने कंधों से जिम्मेवारी एकदम देते हैं उतार
सोचता रह जाता है कोई कि यह क्या हो गया
झूठ बोलते है फिर मुकर जाते हैं लेते है पल्ला झाड़
सबसे ज्यादा यू टर्न लेते हैं नेता छोटा हो या बड़ा
कड़वे बचनों का तीर रहता है इनके तरकश में पड़ा
चिकना घड़ा होते हैं इनको परवाह नहीं किसी की
वक्त पड़ने पर होता नहीं किसी के साथ खड़ा
अभी कहते हैं कुछ थोड़ी देर में हैं मुकर जाते
जुबान इनकी चलती है दोष मीडिया पर हैं मढ़ आते
आका को खुश करने से बिल्कुल नहीं हैं घबराते
असर इन पर कोई नहीं चिकने घड़े हैं बन जाते
सड़क पर जब आगे हैं निकल जाते
तब यू टर्न लेकर फिर हैं लौट आते
यू टर्न लेना भी कई बार होता है जरूरी
वरना अपनी मंजिल तक कभी नहीं पहुंच पाते
बॉस अपने मातहत से करवाता है बहुत काम
न करे तो फिर फंस जाती है आफत में जान
लिखित में होता नहीं धौंस से है करवाता
उसकी यू टर्न से फंस जाता है कोई,आता नहीं उसका नाम
— रवींद्र कुमार शर्मा
