कुण्डली/छंद

कलाधर घनाक्षरी

संविधान पूजनीय, शिल्पकार वंदनीय, राष्ट्र प्रेम हेतु धीर, त्याग कर्म साधना।।

रक्षणार्थ प्राण दीप, धर्म ज्योति हो प्रदीप, शत्रु धीठ हो परास्त, शूर वीर चाहना।।

सौख्य पुष्प बाग छाँव, नेह शीत आस ठाँव, तोष रश्मियाँ हजार, ओज मोद कामना।।

नीति रीति भान ध्यास, संविधान से विकास, जीत गीत गात विश्व, भारतीय आशना।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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