मृत्यु नव जीवन
फ़रेब जिंदगी इक फ़साना ।
सच तो है सिर्फ, मृत्यु का आना ।।
अजर-अमर न कोई जहां में ।
रो क़ब्र पे 2-दिन, चलें रफ़्तार से ज़माना ।।
माया-न-काया, साथ कर्मों को जाना ।
आखिरी साथ! अग्नि तक हैं निभाना ।।
मालूम हैं आत्मा के सीवा! नश्वर सब ।
फिर क्यूँ मोह दुनिया से लगाना ।।
मृत्यु हैं, नव जीवन चक्र ।
फिर क्यूँ मृत्यु पे अश्क बहाना ।।
हो जाती आखें… नम अक्सर ।
मगर! ये दुनिया तेरा घर न मेरा ठिकाना ।।
फ़रेब हैं जिंदगी, इक अफ़साना ।
सच तो हैं सिर्फ मृत्यु का आना ।।
— रीना सिंह गहलोत (रचना)
