कविता

मृत्यु नव जीवन

फ़रेब जिंदगी इक फ़साना ।
सच तो है सिर्फ, मृत्यु का आना ।।

अजर-अमर न कोई जहां में ।
रो क़ब्र पे 2-दिन, चलें रफ़्तार से ज़माना ।।

माया-न-काया, साथ कर्मों को जाना ।
आखिरी साथ! अग्नि तक हैं निभाना ।।

मालूम हैं आत्मा के सीवा! नश्वर सब ।
फिर क्यूँ मोह दुनिया से लगाना ।।

मृत्यु हैं, नव जीवन चक्र ।
फिर क्यूँ मृत्यु पे अश्क बहाना ।।

हो जाती आखें… नम अक्सर ।
मगर! ये दुनिया तेरा घर न मेरा ठिकाना ।।

फ़रेब हैं जिंदगी, इक अफ़साना ।
सच तो हैं सिर्फ मृत्यु का आना ।।

— रीना सिंह गहलोत (रचना)

रीना सिंह गहलौत 'रचना'

कवयित्री नई दिल्ली

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