गीतिका/ग़ज़ल

हमको ये मंजूर नहीं है

हमको  ये  मंज़ूर  नहीं  है।
क्योंकि वो मजबूर नहीं है।

मत  गाओ  राग  अधूरा,
इसमें लय भरपूर नहीं है।

नफ़रत की दीवार उठाओ, 
ये  हमको  मंजूर  नहीं  है।

वो तो करता प्यार की बातें,
तुम जैसा  वो  क्रूर नहीं है।

गोटी कितनी भी तुम खेलों,
जीत हमसे अब दूर नहीं है।

चाहे जितना स्वांग रचाओं,
उसका कोई कसूर नहीं है।

कितना और बतायें तुमको, 
दोषी अब ये हुजूर नहीं है।

बिन पतवार चली कब नैया,
बात सही पर गुरूर नहीं है।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921