कुण्डली/छंद

दोहावली 

सेवा से सार्थक करे, करुणा दया विधान।

मानवता खिलती जहाँ, साथ रहे भगवान।।

सत्कर्मो की रोशनी, जीव दया का भान।

धर्म कर्म हो सादगी, कण-कण में भगवान।।

सत्य शील संयम जहाँ, रमते हैं भगवान।

भाव भक्ति कर अर्चना, प्रभु देते वरदान।। 

मातु-पिता गुरू का करें, हम आदर सम्मान।

शुभचिंतक वे सर्वदा, भर-भर देते ज्ञान।। 

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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