लघुकथा

एक गिलास पानी की कीमत

कभी-कभी इंसानियत का एक छोटा-सा काम जीवन की सबसे बड़ी दौलत बन जाता है।

एक दिन एक नन्ही-सी बच्ची प्यास से व्याकुल होकर एक घर के दरवाज़े पर पहुँची। उसने पानी माँगा। घर में रहने वाले दंपति ने उसे केवल एक गिलास पानी ही नहीं दिया, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह अपनाया। बच्ची की तबीयत खराब थी, इसलिए उन्होंने उसका इलाज भी कराया और उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी।

लेकिन उसी घर का मालिक इस व्यवहार से नाराज़ था। वह बार-बार उस दंपति को अपमानित करता और धमकी देता कि यदि घर में कोई मेहमान रह रहा है, तो उसका किराया तुरंत दो, वरना घर खाली कर दो। दंपति विनम्रता से कहते, “अभी हमारे पास पैसे नहीं हैं। नियोक्ता से भुगतान मिलते ही हम पूरा किराया चुका देंगे।” फिर भी उनकी गरीबी और मजबूरी का मज़ाक उड़ाया जाता। उनका अपमान इतना बढ़ गया था कि उनके लिए उस घर में रहना भी कठिन हो गया था।

वह छोटी-सी बच्ची यह सब चुपचाप देख रही थी। उसे उस दंपति की पीड़ा अपनी पीड़ा जैसी लगी। उसके मन में उस एक गिलास पानी का महत्व अब केवल पानी तक सीमित नहीं था; वह उसके लिए इंसानियत और कृतज्ञता का प्रतीक बन चुका था।

समय बीता। बच्ची बड़ी हुई, पढ़-लिखकर जीवन में बहुत आगे बढ़ी और आर्थिक रूप से सक्षम बनी। वर्षों बाद उसने उस दंपति को खोज निकाला। फिर उसने उनके लिए एक सुंदर घर खरीदा और उनके हाथों में उस घर की चाबी सौंप दी।

दंपति की आँखों में खुशी और भावुकता के आँसू थे। उन्होंने पूछा, “बेटी, हमने तो तुम्हें केवल एक गिलास पानी दिया था।”

बच्ची मुस्कुराई और बोली, “आपने मुझे केवल पानी नहीं दिया था, आपने उस दिन मुझे इंसानियत दी थी। मैं तो बस उसी एक गिलास पानी की कीमत लौटाने आई हूँ।”

उस दिन सबने समझा कि नेक काम कभी व्यर्थ नहीं जाता। एक गिलास पानी भी किसी के जीवन में ऐसा बीज बो सकता है, जो वर्षों बाद एक सुंदर घर के रूप में लौटता है।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com