भारत का गौरव
सरोवर सा इतिहास हमारा
स्वच्छ निर्मल परिधान हमारा
फिर भी कर रहे हैं गुस्ताखियां
सूरज चांद सितारा देश हमारा
किसे कहूं भारत का गौरव मैं,
कैसे लिखूं तुम्हारी नादानी मैं।
सब कहते हैं सोने की चिड़िया,
कौन से पंख तुम्हारे लगाऊं मैं।।
देख कर लगता है सब उड़ने लगे हैं,
विचारों की झील में अब फंसे पड़े हैं।
दाने की होड़ में सब बने मिट्ठू मियां,
सब राष्ट्र की सम्पत्ति को लूटने लगे हैं।।
राष्ट्र के प्रति संवेदनशील नहीं हैं,
सब पक्ष प्रति पक्ष बनकर खड़े हैं।
गढ़ रहे हैं बेवजह हजारों कहानियां,
शान्ति और सुरक्षा पर ग्रहण लगे हैं।।
किसे कहूं भारत की गरिमा को मैं,
कैसे लिखूं बलिदानों की कहानी मैं।
अब तो घर में ही होने लगी गद्दारियां,
किसे पढ़ाऊं राष्ट्र हित के सबक को मैं।।
चिंतित हूं आज यह सब देखकर मैं ,
स्वतंत्रता की अस्सी सीढ़ी चढ़आई मैं ।
फिर भी न भर पाया कोई ये खामियां ,
किसे शाश्वत का सरताज पहनाऊं मैं।।
— सन्तोषी किमोठी वशिष्ठ “सहजा”
